
दिल्ली में आयोजित भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच (India-Japan Joint
Economic Forum) के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री
सनाए तकाइची ने हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी के चौथे वाहन निर्माण
प्लांट का उद्घाटन किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत और
जापान के आर्थिक संबंध बेहद खास हैं और यह नया प्लांट हमारी इसी
साझेदारी का एक चमकता हुआ उदाहरण है।
दुनिया की सुजुकी कारें भारत में बन रहीं
पीएम मोदी ने मंच को संबोधित करते हुए एक बड़ा आंकड़ा साझा किया। उन्होंने
बताया कि दुनिया भर में बिकने वाली सुजुकी की कुल कारों में से दो-तिहाई कारें
अकेले भारत में बनाई जाती हैं, जिन्हें यहां से 100 से अधिक देशों में भेजा किया)
जाता है। पीएम ने कहा, “जब जापान की तकनीक और निवेश, भारत की रफ्तार
और बड़े पैमाने के साथ मिलते हैं, तो इससे पूरी दुनिया को फायदा होता है।
” उन्होंने इस मंच से जुड़ने वाले नए जापानी व्यापारियों का भी स्वागत किया।
भारतीय अर्थव्यवस्था का बदल रहा है डीएनए
वैश्विक आर्थिक मंदी और व्यापारिक अनिश्चितता का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने
कहा कि जब हालात मुश्किल होते हैं, तब मजबूत लोग ही आगे बढ़ते हैं। उन्होंने
बताया कि पिछले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.7% रही है, जो इसे दुनिया
की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाती है। पीएम ने कहा कि पिछले 12
सालों में भारत ने जापान की काइजेन (लगातार सुधार करने की) सोच को अपनाया
है, जिससे देश का आर्थिक डीएनए बदल रहा है।
10 ट्रिलियन Yen के निवेश से दोगुनी होंगी कंपनियां
व्यापार को और आसान बनाने के लिए पीएम मोदी ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने
कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय जल्द ही एक विशेष जापान बिजनेस वीक का आयोजन
करेगा। इसमें पीएमओ के सीनियर अधिकारी जापानी बिजनेस लीडर्स के साथ सीधी
बातचीत करेंगे ताकि उनकी समस्याओं को समझकर उन्हें दूर किया जा सके। उन्होंने
बताया कि जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन के सर्वे में भी पिछले 4 सालों से
भारत को जापानी बिजनेस के लिए सबसे भरोसेमंद देश माना गया है।
प्रधानमंत्री ने जापानी कंपनियों के सामने एक बड़ा लक्ष्य रखते हुए कहा कि
दोनों सरकारों के बीच पूरा भरोसा और तालमेल है, लेकिन अब इसे नतीजों
में बदलने की जिम्मेदारी व्यापारियों की है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है
कि आने वाले एक दशक में भारत में जापान का निवेश 10 ट्रिलियन येन को
पार कर जाए और भारत में काम करने वाली जापानी कंपनियों की संख्या
दोगुनी हो जाए। दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा, एआई, रक्षा, स्वास्थ्य और
सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिलकर काम करने का
फैसला किया है।