जब अपना धाम नही बचा सके तो भक्तों को कैसे बचाएंगे

इस्लामी खलीफा कहलाने वाले टर्की ने कहा

जब अपना धाम नही बचा सके तो भक्तों को कैसे बचाएंगेजब केदारनाथ में आपदा आयी थी, खुद को इस्लामी जगत का खलीफा कहलाने

वाले टर्की ने कहा था कि

“हिंदुओं के भगवान जब अपना धाम नही बचा सके बचाएंगे”

आज बहुत सारे टर्की भूकंप में मारे गए।

किंतु मेरा धर्म मुझे यह शिक्षा नहीं देता कि मैं इसे थेंक्सगिविंग डे कहकर पुकारूँ।

 

जब अपना धाम नही बचा सके तो भक्तों को कैसे बचाएंगे

हाल ही में जिस वायनाड का नाम खूब चर्चा में रहा वो मोपला नरसंहार का भी क्षेत्र था।

दुनिया से आखरी इस्लामिक खलीफा (ऑट्टोमन सल्तनत) के ख़त्म होने के दौर में

हुए इन नरसंहारों में काफिरों और धिम्मियों पर अनगिनत पैशाचिक ज़ुल्म ढाए गए थे।

जेहादियों को बूटों तले कुचलने के बाद जब फिरंगी हुक्मरानों ने मुक़दमे चलाए, तो

अमानवीय अत्याचारों की कई कहानियाँ बाहर आईं। ये नरसंहार अरब के ऑट्टोमन

खलीफाओं की हुकूमत फिर से लागू करने के लिए वहाँ से मीलों दूर,

भारत के सुदूर दक्षिण में क्यों हुआ

भारत के सुदूर दक्षिण में क्यों हुआ? किसी अरबी मुल्क की सल्तनत से भारत के

दक्षिण के इस इलाके को क्या फायदा होता या फर्क पड़ता? ये सभी वो अजीब सवाल हैं,

जिनके पूछे जाने पर ‘शेखुलर’ जज़्बात आपा के आहत हो जाने का खतरा रहता है।

ऑट्टोमन सल्तनत आखिरी इस्लामिक खलीफा की सल्तनत थी

जो पहले विश्व युद्ध में जर्मनी की ओर से लड़कर हारी थी। हो सकता है

आपने कभी ‘तीन मूर्ती’ भवन का नाम सुना हो। इस मकान में कभी जवाहरलाल नेहरु

का आवास भी रहा था। इसके ठीक सामने जो तीन मूर्तियाँ बनी हैं, उन्हीं के

जब अपना धाम नही बचा सके तो भक्तों को कैसे बचाएंगे

नाम पर इस भवन का नाम पड़ा है। हीरो ऑफ़ हाइफा कहलाने वाले मेजर दलपत सिंह

शेखावत हाइफा के मोर्चे पर थे। उनकी कमान में जोधपुर स्टेट की टुकड़ी थी

और उनका साथ देने के लिए वहां हैदराबाद स्टेट और मैसूर स्टेट के सिपाही भी थे।

जोधपुर, हैदराबाद और मैसूर स्टेट को दर्शाने के लिए ही हाइफा के विजेताओं की

ये तीन मूर्तियाँ इस भवन के सामने हैं। हाइफा क्या है, या कहाँ है, जैसा कुछ सूझ रहा हो तो बता दें

कि ये इजराइल के सबसे बड़े शहरों में से एक है। इसकी आजादी में भारतीय

सैनिकों के योगदान की वजह से ही इजरायल के प्रधानमंत्री भारत आने पर तीन मूर्ती देखने जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »