Nijjar की हत्या को लेकर कनाडा ने अब क्या नया कह दिया

Nijjar की हत्या को लेकर कनाडा ने अब क्या नया कह दिया
Nijjar की हत्या को लेकर कनाडा ने अब क्या नया कह दिया
विदेशी हस्तक्षेप आयोग के सामने पेश होते हुए ग्लोबल अफेयर्स कनाडा (जीएसी)
में इंडो-पैसिफिक के सहायक उप मंत्री वेल्डन ईप ने कहा कि कूटनीति के तहत रॉयल
कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) द्वारा जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि जब
तक जांच पूरी नहीं हो जाती, हमारे पास खुफिया जानकारी पर आधारित आरोप हैं।
कनाडाई सरकार ने कहा है कि वो अभी भी खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर
की हत्या के मामले में कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच के नतीजों का
इंतजार कर रही है। कनाडा की तरफ से यह स्पष्टीकरण पिछले साल 18 सितंबर को
हाउस ऑफ कॉमन्स में कनाडाई प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो के भारतीय एजेंटों और
निज्जर की हत्या के बीच संभावित संबंध के विश्वसनीय आरोप वाले बयान के एक
साल बाद कनाडा की तरफ से ये स्टैंड देखने को मिा है। उस बयान के कारण द्विपक्षीय
संबंधों में खटास आ गई।  भारत के सबसे वांछित आतंकवादियों में से एक, हरदीप
सिंह निज्जर भी एक कनाडाई नागरिक था। 

Nijjar की हत्या को लेकर कनाडा ने अब क्या नया कह दिया

विदेशी हस्तक्षेप आयोग के सामने पेश होते हुए ग्लोबल अफेयर्स कनाडा (जीएसी) में

इंडो-पैसिफिक के सहायक उप मंत्री वेल्डन ईप ने कहा कि कूटनीति के तहत रॉयल

कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) द्वारा जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि जब

तक जांच पूरी नहीं हो जाती, हमारे पास खुफिया जानकारी पर आधारित आरोप हैं।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार की संलिप्तता पर कोई फैसला नहीं आया है, इसलिए हम

आरसीएमपी द्वारा अपना काम पूरा करने का इंतजार कर रहे हैं।कनाडा की नीति

बहुत स्पष्ट है कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। हत्या

की जांच कर रही इंटीग्रेटेड होमिसाइड इन्वेस्टिगेशन टीम (IHIT) ने चार भारतीय

नागरिकों की गिरफ्तारी की घोषणा की। उन पर प्रथम श्रेणी हत्या और हत्या की

साजिश से संबंधित आरोप हैं और उनका मुकदमा नवंबर के मध्य में फिर से शुरू

होने की उम्मीद है।राष्ट्रपति ट्रूडो ने कहा था कि भारत के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और

कनाडाई लोगों की सुरक्षा और कानून के शासन से जुड़े कुछ बहुत गंभीर मुद्दों पर

बातचीत फिर से शुरू हो सकती है। पिछले साल, भारत ने जस्टिन ट्रूडो के आरोपों

को बेतुका बताते हुए खारिज कर दिया था और कनाडा को खालिस्तान समर्थक सिखों

का केंद्र बनने पर चिंता भी जताई थी। हालांकि कनाडा ने इसे स्वीकार नहीं किया था।

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