
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम को राहत
अंतरिम राहत के रूप में चिदंबरम ने निचली अदालत में जारी कार्यवाही पर रोक लगाने का
अनुरोध किया है। निचली अदालत ने 27 नवंबर, 2021 को एयरसेल-मैक्सिस मामले में
चिदंबरम और कार्ति के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और ईडी द्वारा दायर
आरोपपत्रों पर संज्ञान लिया और उन्हें बाद के दिनों में तलब किया था। चिदंबरम के वकील
ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 197 (1) के तहत अभियोजन के लिए
मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य है और ईडी ने कांग्रेस नेता के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए
आज तक मंजूरी नहीं ली है। वकील ने कहा कि वर्तमान में आरोपों पर विचार के लिए निचली
अदालत के समक्ष कार्यवाही तय है। सीआरपीसी की धारा 197 (1) के अनुसार, जब कोई
व्यक्ति जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या लोक सेवक है या था, जिसे सरकार की मंजूरी के
बिना उसके पद से हटाया नहीं जा सकता, उस पर किसी ऐसे अपराध का आरोप लगाया
जाता है जो उसके द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में कार्य करते समय या
कार्य करने की परिकल्पना करते समय किया गया है, तो कोई भी अदालत पूर्व मंजूरी के
बिना ऐसे अपराध का संज्ञान नहीं लेगी। आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए विशेष न्यायाधीश
ने कहा था कि सीबीआई और ईडी द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार एवं धन शोधन के मामलों में
चिदंबरम तथा अन्य आरोपियों को तलब करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। ये मामले
एयरसेल-मैक्सिस सौदे में विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने
में कथित अनियमितताओं से संबंधित हैं। यह मंजूरी 2006 में दी गई थी, जब चिदंबरम
केंद्रीय वित्त मंत्री थे। सीबीआई और ईडी ने आरोप लगाया है कि वित्त मंत्री के तौर पर
चिदंबरम ने अपनी क्षमता से परे जाकर समझौते को मंजूरी दी, जिससे कुछ खास
लोगों को फायदा पहुंचा और रिश्वत मिली