कितने बच्चे पैदा करना देश के लिए अच्छा है

कितने बच्चे पैदा करना देश के लिए अच्छा है
कितने बच्चे पैदा करना देश के लिए अच्छा है
महंगाई के इस दौर में दंपति कम बच्चे पैदा करने पर जोर दे रहे हैं। ऐसा सिर्फ भारत में नहीं
हो रहा है। दुनिया के कई देश इस समस्या से जूझ रहे हैं। कुछ देशों में तो युवा आबादी से
ज्यादा आबादी बूढ़ों की हो गयी है जिसके चलते वहां की सरकारें बच्चा पैदा करने के लिए
तमाम तरह के प्रोत्साहन भी दे रही हैं। लेकिन दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश
भारत में आबादी के बढ़ने की दर का घटना अब चिंता का विषय बनता जा रहा है। कुछ
लोगों की चिंता यह है कि एक वर्ग तो अपनी आबादी बढ़ाने में लगा है जबकि दूसरा वर्ग
बच्चों का लालन पालन सही तरीके से हो सके, यह सोचते हुए कम बच्चे पैदा कर रहा है
जिससे उस समाज की आबादी घटती जा रही है। ऐसे में चिंता यह उभर रही है कि कहीं
भारत का सामाजिक संतुलन ही ना बिगड़ जाये। इसीलिए जनसंख्या नियंत्रण कानून
लाने की मांग भी की जा रही है जिसका एक वर्ग विरोध कर रहा है। भाजपा के पास चूंकि
अब लोकसभा में अपने बलबूते स्पष्ट बहुमत नहीं है इसलिए इस बात की संभावना
कम है कि वह जनसंख्या नियंत्रण कानून लाये। इसलिए अब हिंदुओं से ज्यादा बच्चे
पैदा करने का आग्रह किया जा रहा है।इस बीच, घटती आबादी पर चिंता जताते हुए
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सभी को तीन बच्चे पैदा करने की जो सलाह दी
है उस पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा और एनडीए के नेता जहां मोहन
भागवत की टिप्पणी का बचाव कर रहे हैं वहीं विपक्षी दलों ने संघ प्रमुख को आड़े हाथ
लिया है। लेकिन यहां एक बात ध्यान रखने लायक है कि मोहन भागवत ने ही ज्यादा
बच्चे पैदा करने की सलाह नहीं दी है।

कितने बच्चे पैदा करना देश के लिए अच्छा है

जहां तक मोहन भागवत के बयान की बात है तो आपको बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक

संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने जनसंख्या वृद्धि में गिरावट पर चिंता जताते हुए कहा है

कि भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) मौजूदा 2.1 के बजाए कम से कम तीन होनी

चाहिए। दरअसल टीएफआर का तात्पर्य एक महिला द्वारा जन्म दिए जाने वाले बच्चों

की औसत संख्या से है।नागपुर में ‘कठाले कुलसम्मेलन’ में उन्होंने परिवारों की

महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला और आगाह किया कि जनसंख्या विज्ञान के

अनुसार, यदि किसी समाज की कुल प्रजनन दर 2.1 से नीचे जाती है, तो यह विलुप्त

होने के कगार पर पहुंच सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘जनसंख्या में कमी गंभीर चिंता का

विषय है। जनसांख्यिकी अध्ययनों से पता चलता है कि जब किसी समाज की कुल

प्रजनन दर 2.1 से नीचे जाती है, तो उसके विलुप्त होने का खतरा होता है। इस गिरावट

के लिए जरूरी नहीं कि बाहरी खतरे हों; कोई समाज धीरे-धीरे अपने आप ही विलुप्त हो

सकता है।’’ भागवत ने कहा, ‘‘इस मुद्दे के कारण कई भाषाएं और संस्कृतियां पहले ही

विलुप्त हो चुकी हैं। इसलिए, प्रजनन दर को 2.1 से ऊपर बनाए रखना आवश्यक है।’’

उन्होंने कहा कि कुटुंब (परिवार) समाज का अभिन्न अंग है और हर परिवार की समाज

के गठन में अहमियत है।

 

 

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