
क्षेत्र के लोगों को नया विधायक मिलना तय
मिक्स आबादी और शहरी इलाका होने के चलते यहां जीत-हार के लिए कोई एक फैक्टर काम नहीं करता है।
इसके साथ ही कोई बड़ा जातिगत समीकरण यहां हावी होता नहीं दिखाई देता है। ज्यादातर वोटर अपने
उम्मीदवार, पार्टियों के प्रति अपने झुकाव, राजनीतिक दलों के द्वारा किए गए चुनावी वादों या मौजूदा
विधायक के परफॉर्मेंस के आधार पर वोट करते रहे हैं। यहां करीब 15 प्रतिशत पूर्वांचली और लगभग इतने
ही प्रतिशत उत्तराखंडी वोटर हैं। वहीं, गुर्जर वोटरों की तादाद भी 8 से 10 प्रतिशत के बीच है और लगभग
इतने ही दलित वोटर्स भी हैं।क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग के वोटरों की तादाद भी 20 प्रतिशत से अधिक हैं, तो करीब
10-12 प्रतिशत ब्राह्मण और 5-6 प्रतिशत मुस्लिम वोटर भी हैं। यही वजह है कि यहां चुनाव में ज्यादातर
कड़ी टक्कर देखने को मिलती है। चाहे, वह बीजेपी और कांग्रेस के बीच रही हो या बीजेपी और आम आदमी
पार्टी के बीच रही हो। लहर वाली बंपर यहां जीत केवल 2015 के चुनाव में ही दिखाई दी थी।आम आदमी पार्टी
के कब्जे वाली पटपड़गंज में पीने के साफ पानी की समस्या एक बड़ा गंभीर मुद्दा है। सिर्फ झुग्गी झोपड़ियों और
अनधिकृत कॉलोनियों में ही नहीं बल्कि डीडीए फ्लैट्स और अपार्टमेंट में भी लोग गंदे पानी की सप्लाई को
लेकर भी आमतौर पर शिकायत करते रहते हैं। कई जगह तो लोग साफ पानी खरीद कर पीने को मजबूर हैं।
झुग्गी बस्तियों और अनधिकृत कॉलोनियों में सफाई व्यवस्था और सीवर की समस्या भी एक बड़ा मुद्दा है।
स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में भी स्थिति लचर है।