पांच दिन की पुलिस हिरासत में आरोपी

पांच दिन की पुलिस हिरासत में आरोपी
पांच दिन की पुलिस हिरासत में आरोपी
पुलिस को आरोपी की हिरासत देते हुए अदालत ने कहा, ‘आरोपी बांग्लादेश का नागरिक है। अंतरराष्ट्रीय
 
साजिश की आशंका को असंभव नहीं कहा जा सकता। इसलिए, जांच अधिकारी को पर्याप्त समय दिया
जाना चाहिए। इसलिए, 5 दिन की पुलिस हिरासत दी जा रही है।’बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर
हमला करने के आरोपी 30 वर्षीय मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद को मुंबई की अदालत ने पांच दिन
की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। रविवार को गिरफ्तारी के बाद आरोपी को बांद्रा की अवकाशकालीन
अदालत में पेश किया गया था, जहां उसे 24 जनवरी तक मुंबई पुलिस की हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस को आरोपी की हिरासत देते हुए अदालत ने कहा, ‘आरोपी बांग्लादेश का नागरिक है। अंतरराष्ट्रीय
साजिश की आशंका को असंभव नहीं कहा जा सकता। इसलिए, जांच अधिकारी को पर्याप्त समय दिया
जाना चाहिए। इसलिए, 5 दिन की पुलिस हिरासत दी जा रही है।’

पांच दिन की पुलिस हिरासत में आरोपी

आरोपी मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद को रविवार को मुंबई के ठाणे से गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने दोपहर डेढ़ बजे आरोपी को बांद्रा की अवकाशकालीन अदालत में पेश किया। पुलिस ने 14

दिन की हिरासत मांगी, जिसका बचाव पक्ष के वकील ने विरोध किया।अदालत में सुनवाई के दौरान,

जांच अधिकारी ने 14 दिन की हिरासत की मांग का बचाव किया। उन्होंने कहा, ‘सैफ अली खान को

गंभीर चोटें आईं, जिसमें उनके शरीर में चाकू घुस गया। हमें यह जांच करनी होगी कि आरोपी

अभिनेता के घर में कैसे घुसा और हमले के पीछे उसका क्या मकसद था। वह बांग्लादेशी नागरिक

है और यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि वह देश में कैसे घुसा। हमें 14 दिन की हिरासत की जरूरत

है।’बचाव पक्ष के वकील ने 14 दिन की हिरासत का विरोध किया। उन्होंने कहा, ‘मामले को

अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है, क्योंकि इसमें सैफ अली खान शामिल है। अन्यथा, इसे

सामान्य मामले की तरह ही माना जाता। रिमांड आवेदन में हिरासत के कारणों को स्पष्ट रूप

से नहीं बताया गया। आरोपी एक युवा लड़का है, जिसका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है

और उसे बलि का बकरा बनाया जा रहा है।’ बचाव पक्ष के अनुसार, आरोपी को मामले के विवरण

की जानकारी नहीं है।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा, ‘जांच अपने शुरुआती

चरण में है और आरोपी को आज ही गिरफ्तार किया गया है। इसलिए, जांच की पर्याप्त अवधि

के लिए रिमांड मांगने का आधार उचित है। बचाव पक्ष के वकील द्वारा गिरफ्तारी में अवैधता

का उठाया गया आधार बिना किसी ठोस तर्क के प्रतीत होता है।’

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