
प्रदर्शन के दौरान गैर हाजिर रहे डॉक्टरों को सुप्रीम कोर्ट से राहत
सीजेआई ने कहा कि हम यह स्पष्ट करना उचित समझते हैं कि यदि विरोध करने वाले कर्मचारी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद काम में शामिल हुए थे तो उनकी अनुपस्थिति को नियमित किया
जाएगा और इसे ड्यूटी से अनुपस्थिति नहीं माना जाएगा। यह मामलों के विशिष्ट तथ्यों और
परिस्थितियों में जारी किया गया है और कोई मिसाल कायम नहीं कर रहा है। डॉक्टरों के संगठन
की ओर से पेश वकील ने कहा कि विरोध अवधि को छुट्टी मानने का निर्णय कुछ मेडिकल स्नातकोत्तर
छात्रों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार
मेहता ने कहा कि चूंकि मामला गैर-प्रतिद्वंद्वात्मक है, इसलिए अस्पताल शीर्ष अदालत के निर्देशों
का पालन करेंगे। मेहता ने कहा कि एम्स, दिल्ली ने इस अवधि को डॉक्टरों द्वारा ली गई
अनुपस्थिति की छुट्टी के रूप में मानने का फैसला किया है। पहले के एक आदेश में कहा गया
था कि आदेश की तारीख तक विरोध प्रदर्शन करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम
नहीं उठाया जाएगा। 20 जनवरी को सियालदह सत्र अदालत ने पिछले साल 9 अगस्त को आरजी
कर अस्पताल में एक ऑन-ड्यूटी प्रशिक्षु डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के अपराध में एकमात्र
दोषी संजय रॉय को उसके प्राकृतिक जीवन के अंत तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
पिछले साल डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के बाद देश भर में बड़े पैमाने पर आक्रोश फैल गया था
और पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन हुआ था। डॉक्टरों की हड़ताल से देश के
विभिन्न हिस्सों में चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुईं।