
बिहार में बोले राहुल गांधी संविधान सिर्फ किताब नहीं
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर कड़े तेवर जारी रखते हुए राहुल ने कहा कि वह भारत के हर
संस्थान से डॉ. बीआर अंबेडकर, भगवान बुद्ध, महात्मा गांधी की विचारधारा को मिटा रहे हैं। उन्होंने
कहा कि भारत के संविधान में कहां लिखा है कि भारत की सारी संपत्ति केवल दो या तीन लोगों के
हाथों में जानी चाहिए। आज के भारत में विधायकों और सांसदों के पास कोई शक्ति नहीं है। जब मैं
बीजेपी के उन सांसदों से मिलता हूं जो पिछड़े समुदाय से हैं, दलित हैं, आदिवासी हैं तो वो कहते हैं कि
हमें पिंजरे में बंद कर दिया गया है। राहुल ने कहा कि जैसे हमारा संविधान इस हॉल के कोने-कोने
तक पहुंच गया। वैसे ही हम संविधान को हिंदुस्तान के कोने-कोने तक पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने
कहा कि संविधान सिर्फ किताब नहीं है। इस किताब में हजारों साल की सोच है। इसमें हिंदुस्तान की
सोच है। इस संविधान में भगवान बुद्ध, नारायण गुरु जी, बसवन्ना जी, फुले जी, गांधी जी, अंबेडकर
जी की आवाज है। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं, इसमें दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों के साथ हुए
अन्याय का दुख-दर्द भी है। हमारे संविधान ने इस दर्द को कम करने का काम किया है। राुल ने कहा
कि हम जाति जनगणना की अपनी मांग पर कायम रहेंगे, यह विकास योजनाओं के लिए जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों और दलितों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व तो मिला लेकिन
उनके पास कोई शक्ति नहीं है।