बॉम्बे हाई कोर्ट ने मध्यस्थता का दिया आदेश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मध्यस्थता का दिया आदेश
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मध्यस्थता का दिया आदेश
अभिषेक लोढ़ा का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता जनक द्वारकादास ने मध्यस्थ
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रवींद्रन के नाम की एक चिट अदालत को सौंपी। द्वारकादास ने कहा
कि उन्होंने (अभिनंदन लोढ़ा) दो नाम दिए। हालांकि हम दोनों से सहमत हैं, लेकिन हमारी
प्राथमिकता एक है।सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरवी रवीन्द्रन को
शुक्रवार को चार सप्ताह के भीतर ‘लोढ़ा’ ट्रेडमार्क के उपयोग पर विवाद को सुलझाने के लिए
मध्यस्थ नियुक्त किया गया। ऐसा तब हुआ जब अभिषेक लोढ़ा और अभिनंदन लोढ़ा ने बॉम्बे
हाई कोर्ट को बताया कि वे मध्यस्थता में जाने के लिए सहमत हैं। न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर
की पीठ ने एक आदेश में मध्यस्थता प्रक्रिया को चार सप्ताह में पूरा करने का निर्देश दिया।
अगर यह सफल नहीं हुआ तो अदालती कार्यवाही शुरू होगी और इसकी सुनवाई की अगली
तारीख 17 मार्च तय की गई है। 

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मध्यस्थता का दिया आदेश

अभिषेक लोढ़ा का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता जनक द्वारकादास ने मध्यस्थ

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रवींद्रन के नाम की एक चिट अदालत को सौंपी। द्वारकादास ने कहा

कि उन्होंने (अभिनंदन लोढ़ा) दो नाम दिए। हालांकि हम दोनों से सहमत हैं, लेकिन हमारी

प्राथमिकता एक है। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रवींद्रन के नाम पर दोनों पक्ष सहमत थे और

फिर उन्हें लोढ़ा बंधुओं के बीच ट्रेडमार्क विवाद में मध्यस्थता के लिए मध्यस्थ के रूप में नियुक्त

किया गया। अभिषेक और अभिनंदन महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के बेटे हैं। हालाँकि,

चूंकि आनंद और नाइक, प्रवीण आनंद, अमीत नाइक और मधु गडोदिया जैसे विभिन्न वकीलों

द्वारा प्रतिनिधित्व की गई कई कंपनियां और निदेशक थे, जो मुकदमे के पक्षकार हैं, वकील

डेरस खंबाटा ने कहा, यह व्यर्थ की कवायद नहीं होनी चाहिए, इसलिए सभी पार्टियों को मध्यस्थता

प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए।हालाँकि जस्टिस डॉक्टर ने कहा कि यदि

आपके पास दस लोग चर्चा कर रहे हैं तो संभवतः अधिक लोग पहिया में एक स्पैनर डाल देंगे।

यदि यह दो भाइयों के बीच तय हो जाता है, तो क्या यह कंपनियों के बीच डोमिनोज़ प्रभाव के

रूप में तय नहीं होगा?खंबाटा ने प्रस्तुत किया कि मैक्रोटेक एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी है

और यह मध्यस्थता में तय किए गए फैसले से बाध्य नहीं है। मेरा मानना ​​​​है कि कंपनियां

मध्यस्थता प्रक्रिया में औपचारिक पक्ष हो सकती हैं। 

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