भौम प्रदोष व्रत से वैवाहिक अड़चनें होती हैं दूर

Bhaum Pradosh fast
आज साल का पहला प्रदोष व्रत है, साथ ही आज भौम प्रदोष व्रत भी है, इस दिन
शिव जी की पूजा की जाती है लेकिन मंगलवार के दिन प्रदोष होने का खास महत्व है
तो आइए हम आपको भौम प्रदोष व्रत की विधि एवं महत्व के बारे में बताते हैं।

आज मंगलवार को भौम प्रदोष व्रत करने से शिव संग हनुमान जी की कृपा बरसेगी।

जिन लोगों के विवाह में अड़चने आ रही हैं वह भौम प्रदोष व्रत कर हनुमान जी को

चोला चढ़ाएं और शिव जी का दूध से अभिषेक करें। पंडितों का मानना है कि

इससे मांगलिक दोष दूर होता है। इस साल भौम प्रदोष व्रत 9 जनवरी को पड़ रहा है। शादी में रुकावटें नहीं आती है।

जानें भौम प्रदोष व्रत का पौराणिक महत्व

इस साल का पहला प्रदोष व्रत मंगलवार को है, जिसे भौम प्रदोष के नाम से जाना जाता है।

इस शुभ दिन पर समर्पण और भक्ति के साथ भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करने

से भक्तों को उनकी इच्छाओं के करीब ले जाया जा सकता है। भौम प्रदोष व्रत पर देवताओं

की पूजा करने से सौभाग्य, समृद्धि और खुशहाली आती है। कुछ भक्त इस दिन भगवान

शिव की पूजा भगवान नटराज के रूप में भी करते हैं. मान्यता है कि, इस व्रत को करने

के बाद माता पार्वती ने भगवान भूत भावन यानी भगवान शंकर को पाया था। इस व्रत

को रखने से घर में समस्त तरह के सुख सुविधाएं मनवांछित फल की प्राप्ति होती है

और इस व्रत के लिए शाम के समय भगवान शिव का विशेष पूजा अर्चना किया जाता है।

भौम प्रदोष व्रत से वैवाहिक अड़चनें होती हैं दूर

मंगल प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। प्रदोष व्रत का दिन बहुत खास होता है।

इसलिए इस दिन सबसे पहले जल्दी उठें और स्नान करें। नहाने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें।

इसके बाद भगवान शिव को ध्यान करके हाथों में जल और पुष्प लेकर भौम प्रदोष या

मंगल प्रदोष व्रत का संकल्प लें। साथ ही भगवान शिव की दैनिक पूजा करें।

प्रदोष व्रत के दिन मन में बुरे ख्याल न लाएं। उस दिन दिन में फलाहार करते हुए

भगवान शिव का भजन-कीर्तन करें। मंगल प्रदोष में शाम को पूजा करना अनिवार्य है

इसके लिए प्रदोष काल की पूजा के लिए स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ कपड़े पहनें।

अब प्रदोष पूजा मुहूर्त में भगवान शिव की विधि पूर्वक पूजा करें।

प्रदोष व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा

पंडितों के अनुसार प्रदोष व्रत से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार एक गांव में

गरीब ब्राह्मणी अपने बेटे के साथ रहती थी। वह रोज अपने बेटे के साथ भीख मांगने जाती थी।

एक दिन उसे रास्ते में विदर्भ का राजकुमार मिला जो घायल अवस्था में था। उस राजकुमार को

पड़ोसी राज्य ने आक्रमण कर उसका राज्य हड़प लिया और उसे बीमार बना दिया था।

ब्राह्मणी उसे घर ले आई और उसकी सेवा करने लगी। सेवा से वह राजकुमार ठीक हो गया

और उसकी शादी एक गंधर्व पुत्री से हो गयी। गंधर्व की सहायता से राजकुमार ने अपना राज्य मिल गया।

इसके बाद राजकुमार ने ब्राह्मण के बेटे को अपना मंत्री बना लिया। इस तरह प्रदोष व्रत के फल

से न केवल ब्राह्मणी के दिन सुधर गए बल्कि राजकुमार को भी उसका खोया राज्य वापस मिल गया।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »