
विकलांगता प्रमाणपत्रों की होगी जांच
यूपीएससी के नियमों के अनुसार, आरक्षण का लाभ उठाने के लिए उम्मीदवार के पास
न्यूनतम 40 प्रतिशत विकलांगता होनी चाहिए। यूपीएससी विशेष रूप से विकलांग उम्मीदवारों
के लिए आयु सीमा, प्रयासों की संख्या और परीक्षा केंद्रों में विशेष प्रावधानों में छूट भी प्रदान
करता है। फिजियोथेरेपी विभाग द्वारा कोई विकलांगता न होने की सूचना देने के बावजूद,
खेडकर को 2022 में यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल (वाईसीएम) अस्पताल से 7 प्रतिशत
लोकोमोटर विकलांगता प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ। उसने कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन
करते हुए सिविल सेवा परीक्षा में अनुमति से अधिक बार उपस्थित होने के लिए प्रमाणपत्र
का उपयोग किया। इससे पहले बीते दिन दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व आईएएस प्रोबेशनर
पूजा खेडकर को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया, जिन पर धोखाधड़ी और गलत
तरीके से ओबीसी और पीडब्ल्यूडी (विकलांग व्यक्ति) कोटा लाभ लेने का आरोप लगाया गया
है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंदर कुमार जांगला ने कहा कि दिल्ली पुलिस को “यह भी जांच
करनी चाहिए कि क्या यूपीएससी के अंदर से किसी ने खेडकर की मदद की थी”। न्यायाधीश ने
मामले में जांच का दायरा भी बढ़ाया और दिल्ली पुलिस को यह जांच करने का निर्देश दिया कि
क्या अन्य व्यक्तियों ने बिना पात्रता के ओबीसी और पीडब्ल्यूडी कोटा के तहत लाभ उठाया है।