
असम से लेकर पश्चिम बंगाल की सीमा तक अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ अब
निर्णायक कार्रवाई का दौर शुरू हो चुका है। गुवाहाटी और भारत बांग्लादेश सीमा पर
हाल में घटी घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने
वालों के लिए अब भारत की धरती सुरक्षित शरणस्थली नहीं बनने दी जाएगी। सुरक्षा
एजेंसियों ने अपनी सख्त कार्रवाई के जरिये यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि बिना वैध
दस्तावेज भारत में घुसने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।हम
आपको बता दें कि गुवाहाटी के पलटन बाजार इलाके में मंगलवार रात पुलिस ने
जांच अभियान के दौरान दस संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया।
नियमित जांच के दौरान जब उनसे पहचान पत्र और भारत में वैध प्रवेश से जुड़े
दस्तावेज मांगे गए तो वे कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। इसके बाद पुलिस
ने उन्हें तत्काल हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। प्रारंभिक जांच के बाद सभी
को सीमा पुलिस के हवाले कर दिया गया। विस्तृत पूछताछ में इन लोगों ने स्वयं को
बांग्लादेश का नागरिक स्वीकार किया, जिसके बाद स्थापित प्रक्रिया के तहत उन्हें
सीमा पार वापस भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।इस पूरे मामले में उस सराय
के संचालक हृदय डेका की भूमिका भी जांच के घेरे में है, जहां ये लोग ठहरे हुए थे।
आरोप है कि सराय संचालक ने नियमों के अनुसार ठहरने वालों की पहचान का
सत्यापन नहीं किया। यह लापरवाही केवल कानूनी उल्लंघन नहीं बल्कि राष्ट्रीय
सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जा रहा है।
सामने थे घुसपैठिये तभी आ गयी BSF Border पर तगड़ा बवाल
इससे कुछ दिन पहले ही 19 जून को भी गुवाहाटी के आर्य नगर इलाके से तेरह
संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए थे। वे भी कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर
सके थे और जांच पूरी होने के बाद उन्हें भी वापस भेज दिया गया था। देखा जाये
तो लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से साफ है कि असम में सुरक्षा एजेंसियां अब
पूरी सतर्कता के साथ अवैध घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चला रही हैं।उधर,
पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले के तपन ब्लाक स्थित लक्ष्मीनारायणपुर
सीमा क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। यहां भारत बांग्लादेश सीमा पर लगभग
तीस लोग जीरो प्वाइंट पर फंसे रहे। मामला तब बिगड़ा जब भारत की ओर से
छत्तीस बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजने की पहल की गई, लेकिन सीमा
सुरक्षा बल की मौजूदगी में पहुंचे इन लोगों को बांग्लादेश सीमा रक्षक बल ने
स्वीकार करने से इंकार कर दिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़
गया।सूत्रों के अनुसार देर रात बांग्लादेश की ओर से कुछ लोगों को फिर भारतीय
सीमा में धकेलने की कोशिश की गई, लेकिन सीमा सुरक्षा बल ने सख्त रुख
अपनाते हुए इस प्रयास को नाकाम कर दिया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि
बांग्लादेश की ओर तीन सौ से अधिक लोग जमा होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे।
जवाब में भारतीय सीमा गांवों के लोग भी सीमा के पास डटे रहे और पूरी स्थिति पर
नजर बनाए रखी।दिन भर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई चरणों में बैठकें
हुईं, लेकिन देर शाम तक कोई अंतिम समाधान सामने नहीं आ सका। हम आपको
बता दें कि यह इलाका लंबे समय से अधूरी सीमा बाड़ और भूमि विवादों के कारण
घुसपैठ के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है।