अमेरिका ने टर्की में F-16 और AMRAAM का मैनुफैक्चरिंग
NATO का एक सदस्य देश है टर्की, यह देश अमेरिका का पुराना सहयोगी रहा है,
अमेरिका अपनी सभी महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियां टर्की के साथ साझा करता है।
अमेरिका टर्की को अपना सबसे उन्नत फाइटर जेट यानि पांचवी पीढ़ी का विमान F-35 तक दे चुका है।
इतना ही नहीं अमेरिका ने टर्की में F-16 और AMRAAM का मैनुफैक्चरिंग यूनिट तक लगवाया है।
परन्तु जब टर्की ने रूस के साथ S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की डील साइन
की तो अमेरिका को अच्छा नहीं लगा, और मुद्दा अमेरिकी संसद में उठा।
अमेरिका रक्षा प्रणालियां टर्की के साथ साझा करता है
वहां सबने एक स्वर में टर्की का विरोध किया जिसके बाद अमेरिका ने न केवल
अपने डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को टर्की में बंद करवा दिया, बल्कि टर्की
को सभी डिफेंस इक्विपमेंट्स का एक्स्पोर्ट त क रोक दिया। टर्की को F-35
की सर्विस, स्पेयर्स और मेंटीनेंस की सुविधाएं भी देनी बंद कर दीं।
इस समय टर्की की अमेरिकी डिफेंस मैनुफैक्चरिंग यूनिट बंद है
टर्की द्वारा अमेरिका से किया जाने वाला हथियारों का आयात तो बिल्कुल ही बन्द हो चुका है।
टर्की के F35 विमानों की पूरी फ्लीट रखरखाव के अभाव में जमीन पर खड़ी रहने को बाध्य है।
इससे दोनों ही देशो को आर्थिक हानि हुई है। इन सबके बावजूद अमेरिका ने अपने
पुराने सहयोगी देश टर्की के लिए भी अपनी डिफेंस
एक्स्पोर्ट नीति से कोई समझौता नही किया और आर्थिक हानि स्वीकार किया।
बता दें कि भारत ने भी रूस के साथ S-400 की वही डील साइन की है।
अमेरिका ने भारत को यह डील करने से रोकने हेतु बहुत प्रयास किए,
पर भारत की मोदी सरकार नहीं मानी। अमेरिकी संसद में भी यह विषय उठा,
अमेरिका रक्षा प्रणालियां टर्की के साथ साझा करता है
किन्तु अधिकांश अमेरिकी सांसदों ने भारत के साथ रक्षा सहयोग व मित्रता को वरीयता दी,
और भारत के विरुद्ध काट्सा कानून लागू करने का विरोध किया।
अंत मे हुआ यह कि भारत की छवि व भारत के बढ़ते वैश्विक कद के कारण
अमेरिका को भारत के लिए अपने हथियार निर्यात कानूनों में बदलाव तक करना पड़ा।
आज भारत अमेरिका का P8i, C-130J सुपर हरक्यूलिस, C-17 ग्लोबमास्टर उपयोग करता है।
अमेरिका के सबसे उन्नत आर्म्ड ड्रोन्स प्रिडेटर ऑर्डर पर हैं। M777
अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर, CH-47 चिनूक व AH-64 अपाचे,
इन सभी डिफेंस प्लेटफॉर्म के लिए आवश्यक सर्विसेज बिना किसी
व्यवधान के अमेरिका द्वारा भारत को समयबद्ध रूप से उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
उपरोक्त सभी उपलब्धियां मोदी सरकार की विदेश नीति और
कूटनीति की सफलता का ज्वलंत उदाहरण हैं। यह मोदी के विदेश नीति का ही परिणाम है