पुतिन के तीखे तेवर. आखिर वह दिन आ ही गया जिसका डर था.
अब जब रूस को यह लगने लगा कि वह कन्वेंशनल वार के अंदर यूक्रेन से नहीं जीत पाएगा
क्योंकि उसके सारे रिसोर्सेज को अमेरिका ने टैप कर दिया है तो वह अपनी
आखिरी चार चलने के लिए मजबूर हो गया है.रूस के राष्ट्रपति ने आज अपने राष्ट्र के
नाम अपने भाषण में जनमत संग्रह करने के लिए कह दिया है धीरे-धीरे अमेरिका
ने रूस को तबाह करने के लिए अपने सभी तरह के हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए हैं
अमेरिका ने रूस को तबाह के लिए सभी तरह के हथकंडे शुरू कर दिए
और शायद यह जनमत संग्रह एटॉमिक वार के बारे में किया जाएगा
जैसा कि मैं पहले भी कई बार लिख चुका हूं कि अगर रूस की बाजू
जरूरत से ज्यादा मरोड़ने की कोशिश की जाएगी तो रूस पूरी दुनिया को तबाह कर देगा।
दुनिया को यह बात याद रखनी चाहिए कि रूस के पास जो विनाशकारी हथियार है
उतने विनाशकारी हथियार दुनिया के और किसी भी देश के पास नहीं है.
परमाणु बमों का भंडार रखने वाला रूस किसी अन्य देश का मोहताज नहीं
हाइपरसोनिक मिसाइल और परमाणु बमों का
भंडार रखने वाला रूस किसी अन्य देश का मोहताज नहीं है.
हालांकि पुतिन के इस बयान के बाद रूस के विदेश मंत्रालय ने साफ़ किया है
कि संधि के मुताबिक़ युद्ध के लिए तैयार परमाणु मिसाइलों और
हथियारों की संख्या पर जो पाबंदी है उसे रूस आगे भी मानता रहेगा.
अमेरिका ने रूस को तबाह के लिए सभी तरह के हथकंडे शुरू कर दिए
रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ये फ़ैसला इसलिए किया गया है
ताकि “हमारी न्यूक्लियर साइटों के बारे में पता लगाने की क्षमता
और इसकी स्थिरता को एक हद तक बचाया जा सके.”
इस संधि से रूस की भागीदारी निलंबित करने की दुनिया भर में चर्चा है.
कहा जा रहा है कि दो परमाणु महाशक्तियों के बीच ये आखिरी
परमाणु समझौता है और अगर ये ख़त्म हो गया तो
दोनों देशों का एक दूसरे पर ‘आर्म कंट्रोल ख़त्म’ हो जाएगा.
ऐसी अवस्था में भारत को क्या स्टैंड लेना चाहिए?
क्या भारत को रूस के इस कृत्य के खिलाफ
अमेरिका के साथ हो जाना चाहिए या भारत को हमेशा की तरह निरपेक्ष रहना चाहिए.
