आतंकवाद और पाकिस्तान चीन से दो टूक बात करने का समय आ गया
भारत और चीन के रिश्तों के लिहाज से यह सप्ताह बहुत ही
ज्यादा महत्वपूर्ण होने जा रहा है। लेकिन उससे पहले जम्मू
कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद
भारत की बहादुर सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के
बारे में भी बात करना जरूरी है। भारत के सर्वदलीय सांसदों
के प्रतिनिधिमंडल में शामिल 59 नेताओं और पूर्व राजनयिकों
ने 33 देशों की यात्रा से वापस लौटने के बाद मंगलवार को
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।भारत के इस
प्रतिनिधिमंडल ने दुनिया भर में पाकिस्तान को बेनकाब
करने की कोशिश की। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि
पाकिस्तान और आतंकवाद, एक दूसरे के पर्यायवाची बन
चुके हैं। हाल के दिनों में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा
आसिफ से लेकर पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल
भुट्टो जरदारी सहित कई नेता यह स्वीकार कर चुके हैं कि
पाकिस्तान आतंकवाद को पनाह देता रहा है। अमेरिका
की यात्रा पर गए बिलावल भुट्टो जरदारी का एक और बयान
काफी चर्चा में है जिसमें आतंकवाद का ठीकरा उन्होंने
अमेरिका पर ही फोड़ दिया है।
आतंकवाद और पाकिस्तान चीन से दो टूक बात करने का समय आ गया
पाकिस्तान, अमेरिका और आतंकवाद इन तीनों के आपसी
संबंधों की कहानी किसी से छिपी नहीं है। पाकिस्तान के रक्षा
मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में स्काई न्यूज के साथ एक
इंटरव्यू के दौरान बस अमेरिका की भूमिका पर फिर से मुहर
लगाने का काम कर दिया था। ख्वाजा आसिफ के शब्दों पर
गौर कीजिएगा। उन्होंने कहा था कि, “हम करीब तीन दशक
से अमेरिका और ब्रिटेन समेत पश्चिमी देशों के लिए यह गंदा
काम (आतंकवाद का समर्थन) कर रहे हैं। यह एक गलती थी
और हमें इसकी कीमत चुकानी पड़ी, इसीलिए आप मुझसे यह
कह रही हैं। अगर हम सोवियत संघ के खिलाफ युद्ध में और
9/11 के बाद की जंग में शामिल नहीं होते, तो पाकिस्तान
का ट्रैक रिकॉर्ड बेदाग होता।”जहां तक अमेरिका की बात है,
वहां के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रवैए से उसकी पोल
लगातार खुल रही है। पाकिस्तान पर एक के बाद एक
अमेरिका जिस तरह की मेहरबानी कर रहा है,वह भी
पूरी दुनिया देख रही है। लॉस एंजिल्स में जो कुछ हुआ
उसके बाद अमेरिकी जनता को भी अहसास होने लगा
है कि उन्होंने कितनी बड़ी गलती कर दी है।