
आपकी वजह से ही नहीं बन पाई AAP की सरकार
अरविंद केजरीवाल की राजनीति का एक सीधा- साधा फॉर्मूला है जो बिल्कूल आसान है लाईट, कैमरा
एक्शन और आरोप। चार शब्दों के इस फॉर्मूले के सहारे अरविंद केजरीवाल ने पहले अन्ना आंदोलन के
जरिए पूरे देश में अपनी पहचान बनाई। जब वो अन्ना हजारे की बगल में बैठा करते थे फिर दिल्ली में
अपनी राजनीति चमकाई जब उन्होंने अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बना ली। वो लगातार लोगों
पर आरोपों के तीर मारकर भागते रहे। ये केजरीवाल की राजनिति का हिट एंड रन स्टाइल था।
अरविंद केजरीवाल ने कॉमन वेल्थ घोटाले में शीला दीक्षित पर तमाम आरोप लगाए। लेकिन अपनी
सरकार के दौरान शीला दीक्षित के खिलाफ न तो कुछ साबित कर पाए और न ही उन पर कोई
कार्रवाई की। अरविंद केजरीवाल ने गैस प्राइसिंग को लेकर मुकेश अंबानी पर आरोप लगाए लेकिन
अब तक कोई ठोस सबूत नहीं मिले। उन्होंने गैस प्राइसिंग पर पूर्व पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली
पर आरोप लगाए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अरविंद केजरीवाल ने बाकायदा एक प्रेस कांफ्रेंस
करके ट्रस्ट में हेराफेरी को लेकर पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद पर भी आरोप लगाए थे। ये मामला
भी आगे नहीं बढ़ा और इसका कोई नतीजा नही निकला। अरविंद केजरीवाल ने 30 भ्रष्ट नेताओं की
एक लिस्ट जारी की थी जिसमें उन्होंने कई नेताओं का नाम लिया था। केजरीवाल इस लिस्ट के बारे
में कुछ नहीं बोलते और जिन लोगों के नाम इस लिस्ट में शामिल थे उन के बारे में भी चुप रहे। इस
लिस्ट में केजरीवाल ने नितिन गडकरी का नाम भी लिया था जिस पर नितिन गडकरी ने केजरीवाल
को मानहानि का नोटिस भेजा था जिसकी वजह से केजरीवाल को जेल भी जाना पड़ा था। क्योंकि वो
कुछ साबित नही कर पाए थे। केजरीवाल ने दूसरों पर लगाए आरोपों को ईटों की तरह इस्तेमाल
करके अपनी राजनीति की दीवार खड़ी कर ली।