भारत की विदेश नीति का प्रभाव उद्योग नीति भी पड़ा है!
देश के जाने माने उद्योगपति मानते हैं कि देश के विकास की असली
इबारत अब लिखी जा रही है! अनेक उद्यमियों द्वारा कईं लेख
इकॉनामिक मैगजींस और आर्थिक जगत संभालने वाले मीडिया में लिखे
गए हैं! औद्योगिक जगत का मानना है की भारत की विदेश नीति का
प्रभाव उद्योग नीति भी पड़ा है!
नीति आयोग देश के विकास का ऐसा ढांचा खड़ा कर रहा है कि कुछ
वर्षों के बाद भारत विकासशील देशों की चौखट को लांघकर विकसित
राष्ट्रों के पायदान पर कदम रख सकता है!
उद्योगपति मानते हैं कि देश के विकास अब लिखी जा रही है
विदेश और उद्योग नीति के दम पर भारत की अर्थव्यवस्था तमाम भीतरी विरोधाभासों के बावजूद काफी स्थिर और सुदृढ़ हो गई है!
देख लीजिए , रूस यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत द्वारा अपनाई गई नीतियों का व्यापक असर दिखाई देने लगा है!
यूरोप और अन्य कईं पश्चिमी देशों ने रूस से सम्बंध खत्म किए तो रूस ने सारा तेल
सस्ती दरों पर भारत को बेचना शुरू कर दिया! भारत इस तेल का खुद भी उपयोग कर रहा है
और कईं देशों को बेचकर भारी मुनाफा भी कमा रहा है! नतीजा यह निकला कि दुनिया
में पैट्रोलियम के सबसे बड़े उत्पादक सऊदी अरब सहित तमाम ओपेक देशों को
अब अपने तेल की कीमत घटानी पड़ रही है! इसका लाभ भारत को भी मिलेगा
जो खाड़ी के देशों के तेल का पुराना उपभोक्ता है!
यूं तो भारत की विदेश नीति हमेशा बढ़िया रही है
यूं तो भारत की विदेश नीति हमेशा बढ़िया रही है, इस दौर में इसका दबदबा बड़े बड़े देशों पर कायम है।
तभी तो सरकार के घोर विरोधी राहुल गांधी को कहना पड़ा कि केंद्र में यदि हमारी सरकार होती
तो रूस और यूक्रेन पर हमारी नीति भी वही होती जो मोदी सरकार की है।
जाहिर है विपक्षी दल होने के कारण कांग्रेस भले ही हर बात पर मोदी सरकार की आलोचना करती हो
परंतु कईं प्रश्नों पर उसके नेताओं की सहमति सरकार के काम से है। बाकी विपक्ष का भी यही हाल है।
शरद पवार और पटनायक जैसे नेता मोदी सरकार के काफी कामों की सराहना करते रहते हैं।
भारत सरकार की रूस नीति ने उस समय हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है,
जब अमेरिका जैसे पूंजीवादी देश भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
उद्योगपति मानते हैं कि देश के विकास अब लिखी जा रही है
विश्वव्यापी आर्थिक संकटों से देश को कईं बार जूझना पड़ा है।
यह सच है कि जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब भी बहुत बड़ा आर्थिक संकट दुनिया में आया था
और भारत बच निकला था। देशवासियों ने उसकी सराहना की थी। याद कीजिए कोरोना काल।
डबल्यू एच ओ तक ने आशंका जताई थी कि भारत बर्बाद हो जाएगा। भारत में 50 करोड़ मौतों की आशंका जताई गई थी।
अब देखिए भारत का जुनून। पांच लाख मौतें हुई और सबसे बढ़िया वैक्सीन भारत ने बनाई, 270 करोड़ डोज लगाई भी।
140 करोड़ लोगों को सुरक्षा कवच देने के बावजूद भारत की अर्थव्यस्था नहीं चरमराई।
भारत सरकार की नीयत पर विपक्ष द्वारा सवाल उठाए गए।
लेकिन हमारी नीतियाँ कल भी कारगर थी और आगे भी रहेंगी।
