
ओलंपिक और चेस चैंपियनशिप से लेकर हॉकी में लहराया तिरंगा
वहीं इस साल फ्रांस की राजधानी पेरिस में खेलों के महाकुंभ का आयोजन हुआ। जिसमें भारत ने भी
प्रतिभाग किया। हालांकि, इस बार ओलंपिक भारत के लिए कुछ खास नहीं रहा, टोक्यो ओलंपिक में
जेवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा द्वारा गोल्ड मेडल, इस बार पेरिस ओलंपिक में बचाव नहीं हो पाया और
नीरज चोपड़ा को सिल्वर से संतोष करना पड़ा। साथ ही पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर ने शूटिंग में 2
ब्रॉन्ज मेडल जीतकर खूब सुर्खियां बटोरी थीं। भारत ने शूटिंग में 3, एथलेकिटक्स, हॉकी और कुश्ती में
एक-एक पदक जीता था। हालांकि, भारतीय खिलाड़ी मेडल की संख्या को दहाई के आंकड़े तक ले जाने
में नाकाम रहे। हालांकि, पैरालंपिक्स इतिहास में भारत ने अपना सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल
29 मेडल जीते। भारत के खाते में कुल 29 मेडल आए, जो पिछली बार की तुलना में 10 अधिक रहे।
भारत को एथलेटिक्स में 17 मेडल, बैडमिंटन में 5, शूटिंग में 4, आर्चरी में 2 और जूडो में एक मेडल
मिला। वहीं अप्रैल में आर्चरी वर्ल्ड कप हुआ, जिसमें भारत ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कुल 15 मेडल
जीते। भारत ने उस टूर्नामेंट में 7 गोल्ड, 5 सिल्वर और 3 ब्रॉन्च मेडल जीते। भारत के ज्यादातर मेडल
टीम स्पर्धाओं में आए थे, लेकिन एकल स्पर्धाओं में भारतीय तीरंदाजों को संघर्ष करना पड़ा। डी गुकेश
यानी डोम्माराजू गुकेश ने महज 18 साल की उम्र में चीन के डिंग लीरेन को मात देकर वर्ल्ड चेस
चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया।