कढ़ी-पकौड़ी भोज के बाद अखाड़ों का महाकुंभ से प्रस्थान शुरू
आश्रमों में विदेशी आकर सनातन धर्म अपना रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न अखाड़ों और आश्रमों में
विदेशियों को मंत्रोच्चारण करते हुए और माला जपते हुए देखा जा सकता है। विदेशी श्रद्धालु संगम
में डुबकी लगाने के बाद खुद को भाग्यशाली भी बता रहे हैं।दुनिया के अलग-अलग देशों में जहां युद्ध
और तरह-तरह की प्राकृतिक घटनाओं से अशांति का माहौल बना हुआ है, वहीं शांति का संदेश देता
सनातन धर्म विदेशी लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। महाकुंभ नगर के सेक्टर-17 में स्थित
शक्ति धाम आश्रम में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच 61 विदेशी श्रद्धालुओं ने जगद्गुरु साईं मां
लक्ष्मी देवी से दीक्षा ली और सनातन धर्म को अपनाया। श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड़ा के
महामंडलेश्वर त्रिवेणी दास महाराज ने बताया कि
सनातन धर्म में आकर इन विदेशी
श्रद्धालुओं के चेहरे पर अद्भुत शांति दिखाई पड़ी, सनातन धर्म ही आज के युवाओं को सही
रास्ता दिखा सकता है और इसी वजह से लोग सनातन की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।यम
में अस्थि रोग चिकित्सा के क्षेत्र में काम करने वाली कैथरीन गिल्डेमिन ने कहा कि रोजमर्रा
के जीवन की भागदौड़ ने उनके जीवन में तनाव काफी बढ़ा दिया था और व्यक्तिगत जीवन
भी ठीक नहीं चल रहा था। इसी दौरान वह जगद्गुरु सांई मां के सानिध्य में आईं जिसके
चलते वह सनातन से रूबरू हुईं और उनके जीवन को एक नयी दिशा मिली। आयरलैंड में
बिक्री और विपणन के क्षेत्र में काम करने वाले डेविड हैरिंगटन का कहना है कि सनातन की
सरलता उन्हें सात समंदर पार भारत की तरफ खींच लाई। सनातन एक ऐसी अकेली जीवन
पद्धति है जो व्यक्ति पर कुछ थोपती नहीं हैं। उन्होंने कहा, “महाकुंभ के अद्भुत और पावन
अवसर पर मैंने सनातन धर्म स्वीकार किया है जो मुझे असीम शांति और आनंद का अनुभव
करा रहा है।
कढ़ी-पकौड़ी भोज के बाद अखाड़ों का महाकुंभ से प्रस्थान शुरू
दीक्षा लेने वालों में अमेरिका के वास्तुकार मैथ्यू लॉरेंस, कनाडा के चिकित्सक आंद्रे अनात,
अमेरिका में ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाले जेनी मिलर, कनाडा में सूचना प्रौद्योगिकी के
क्षेत्र में काम करने वाले मैथ्यू सावोई, बेल्जियम में स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सलाहकार क्रिस्टेल
डी कैट भी शामिल रहे। इस अवसर पर त्रिवेणी दास महाराज ने बताया कि इस महाकुंभ के
दौरान शक्ति धाम के शिविर में जगद्गुरु सांई मां लक्ष्मी देवी के सानिध्य में अभी तक 200
से अधिक विदेशियों ने सनातन की दीक्षा प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि मॉरीशस के एक
ब्राह्मण परिवार में जन्मीं जगद्गुरु साईं मां हिन्दू धर्म के प्रचार-प्रसार में पिछले डेढ़ दशक
से सक्रिय हैं। साईं मां के भक्तों में 12 देशों से अधिक के लोग शामिल हैं, जो अब हिंदू धर्म
स्वीकार कर चुके हैं। इनमें जापान, अमेरिका, इजराइल, फ़्रांस समेत कई अन्य यूरोपीय
देशों के नागरिक भी शामिल हैं।हम आपको बता दें कि अन्य आश्रमों में भी विदेशी आकर
सनातन धर्म अपना रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न अखाड़ों और आश्रमों में विदेशियों को
मंत्रोच्चारण करते हुए और माला जपते हुए देखा जा सकता है। विदेशी श्रद्धालु संगम में
डुबकी लगाने के बाद खुद को भाग्यशाली भी बता रहे हैं।