वी पी शर्मा और यशपाल शर्मा जी का स्वागत
जिसका एक जीवंत उदाहरन दक्षिण दिल्ली के एक “Hotel South Gate” ग्रीन पार्क मे देखने को मिला।
जहा ” गाता रहे मेरा दिल” संगीत ग्रुप के सयोजक, गोपाल कुमार कूल और पंकज शर्मा ने,
सभी मुख्य अतिथियो ग़ीता राना, वी पी शर्मा और यशपाल शर्मा जी का स्वागत
अपने ग्रुप के सभी गायको अनिल खन्ना, राजीव शर्मा, अनिल कपूर,
राजीव श्रीवास्तव, पी एस वर्मा, दीपक चक्रबोर्ति और राज कुमार के साथ किया।
कहेते है कि संगीत और गायकी की कोई सीमा नही होती
इतना ही नहीं, इन सभी गायकों ने सुप्रसिद्ध गायक कलाकारो, जैसे अचल
श्रीवास्तव, इंदू , खुशबू , सोनू, अंजलि, विन्नी, वानी बब्बर, अलका शर्मा,
राजन और अशोक सहज का स्वागत भी पूरे जोश और सम्मान के साथ किया
उन्होंने न सिर्फ सुंदर गीत गाये बल्कि “गाता रहे मेरा दिल” के सभी गायकों और दर्शकों का मन मोह लिया।
अंत में मुख्य अतिथियों के साथ साथ सभी गायकों को स्मृति चिन्ह प्रदान किये गये
और जलपान करने के बाद, सभी “गाता रहे मेरा दिल” के गायकों द्वारा
सभी मेहमान गायक का धन्यवाद देकर इस रंगारंग कार्यक्रम को संपन्न किया गया।
भारत में गीत संगीत, गाना -बजाना एक परंपरा का हिस्सा है
देश के हर हिस्से में गीत गाए जाते हैं. हर राज्य का अपना संगीत है..
लेकिन कहते हैं कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती ,संगीत सरहदों को को भी नहीं मानता.
जो संगीत हम लोगों को झूमने पर मजबूर कर देती है, वो इतना आसान भी नहीं…
गायकी किसी के लिए साधना तो किसी के लिए पूजा होती है..गुरदास मान संगीत के एक ऐसे ही साधक हैं
वो गाते हैं तो लगता है आत्मा गा रही है. उनके गानों में पंजाब की मिट्टी की खुशबू है,
कहेते है कि संगीत और गायकी की कोई सीमा नही होती
उनके गानों में पंजाब को कभी नशे से ऊबारने का दर्द है, और भीषण एक्सीडेंट में अपने भाई जैसे ड्राइवर को खोने का पीड़ा है भी.
4 जनवरी 1957 को पंजाब के गिद्दरबाहा में पैदा हुआ पंजाब का ये गायक
किसी परिचय का मोहताज नहीं. उन्हें देखकर लगता है कि ये बंदा गाने के लिए ही पैदा हुआ है.
साल 1980 में दिल दा मामला ने उन्हें शोहरत दी.तकरीबन
40 साल बाद भी वो ये गाना गाते हैं तो सीधे लोगों के दिलों में उतर जाते हैं.
