देश को महज़ 40 करोड़ रुपये के लिए गिरवी रखने वाले लोग कहते हैं

मौजूदा सरकार ने भारत की अर्थ व्यवस्था को बर्बाद कर दिया

देश को महज़ 40 करोड़ रुपये के लिए गिरवी रखने वाले लोग कहते हैं

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय, एक मशहूर कम्पनी,

एनरॉन नें, महाराष्ट्र के दाभोल में कारखाना लगाने की प्लानिंग की…!!

लेकिन, यह स्थानीय लोगों के प्रतिरोध के कारण, हो न सका !!

फलस्वरूप, बदलती विषम परिस्थितियों से नाराज एनरॉन नें,

भारत सरकार पर ₹38,000 करोड़ के नुकसान की भरपाई का मुकदमा दायर कर दिया…।

वाजपेयी सरकार ने हरीश सालवे (सालवे जी नें, कुलभूषण

जाधव का मुकदमा इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में लड़ कर जीता…)

को भारत सरकार का वकील नियुक्त किया…।

देश को महज़ 40 करोड़ रुपये के लिए गिरवी रखने वाले लोग कहते हैं

पर आप जान कर चोंक जाएंगे कि, एनरॉन के वकील पी.

चिदंबरम बनें…!! यानी, पी चिदंबरम भारत के विरुद्ध…।।

समय बीतता चला गया ..!! बादमें ‘यूपीए’ सरकार बनी…!! कैबिनेट

मंत्री चिदंबरम, एनरॉन की तरफ से मुकदमा नहीं लड़ सकते थे…!!

पर वो कानूनी सलाहकार बने रहे और, वो मुकदमे को एनरॉन के पक्ष में करने में सक्षम थे…।।

अगला खुलासा और चौकानें वाला है!!

चिदंबरम ने तुरंत हरीश सालवे को एनरॉन केस से हटा दिया…।

हरीश साल्वे की जगह, खबर कुरेशी को नियुक्त किया गया

आप ठीक समझे, ये वही पाकिस्तानी वकील है जिसनें,

कुलभूषण जाधव केस में, पाकिस्तान सरकार का मुकदमा लड़ा…!!

कांग्रेस ने भारत सरकार कि तरफ से, पाकिस्तानी वकील को ₹1400/- करोड़ दिये

वकील कि फीस के रुप में…। अंततः भारत मुकदमा हार गया और भारत सरकार

को ₹38,000/- करोड़ का भारी भरकम मुआवजा देना पड़ा…।

लेकिन, लुटीयन मिडिया ने ये खबर या तो गोल दी या सरसरी तौर पर नहीं दिखाई!!

देश को महज़ 40 करोड़ रुपये के लिए गिरवी रखने वाले लोग कहते हैं

अब सोचिए कि ₹38000/- करोड़ का मुकदमा लडने के लिए फीस कितनी ली होगी…?

जो पाठक किसी क्लेम के केस मे वकील कि फीस तय करते है

उन्हें पता होगा कि, वकील केस देखकर दस प्रतिशत से लेकर साठ प्रतिशत तक फीस लेता है…।

सोचिए इस पर कोई हंगामा नही हुआ…?

और एक मजेदार बात .. जिन कम्पनियों का एनरॉन मे निवेश करके

यह प्रोजेक्ट केवल फाईल किया था उनका निवेश महज मात्र 300 मिलियन डालर

… याने उस वक्त कि डालर रुपया विनियम दर के हिसाब से, महज

₹1530/- करोड़ था, और वह भी बैठे बिठाये…।

महज सात साल मे ₹38,000/- करोड़

का फायदा…! वो भी एक युनिट बिजली का संयंत्र लगाये बिना…?

 

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