हिन्दू धर्म विधान में तलाक जैसा कोई शब्द है
जहां जहा दुसरे धर्मों मे शादी एक ‘कॉन्ट्रैक्ट’ है, हिन्दू धर्म में ये ‘जन्म जन्मांतर’ का संबंध है
जो इस जीवन के साथ ही अन्य जीवनों तक भी चलता है.हालाँकि ये बात भी सही है
कि आजकल ‘तलाक’ आम हो गए हैं. पर क्या आपको पता है
हिन्दू धर्म विधान में तलाक जैसा कोई शब्द है ही नहीं. ‘तलाक’ उर्दू है
तो डाइवोर्स इंग्लिश. ऐसा इसलिए क्योंकि हिन्दू धर्म में तलाक के लिए कोई प्रावधान था ही नहीं.
धर्म पत्नी ने भी पति वियोग में प्राण त्याग दिये थे
तलाक तो तभी होगा न जब प्रेम नहीं होगा और हिन्दू धर्म में तो पति-पत्नी को
आजीवन और जीवन के बाद भी एक रहने के लिए आह्वान करता है. अब इसी घटना को देख लीजिए।
ये घटना 2019 की है जो ये दिखाती है कैसे पतिव्रता पत्नियां पति के देह
त्यागते ही स्वयं भी देह त्याग देती हैं। आजकल
कम देखने सुनने को मिलता है पर पृथ्वी अभी सतियों से रिक्त नहीं हुई है।
अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था
मध्य प्रदेश के मोरैना जिला स्थित पोरसा गाँव के पण्डित जी का निधन हो गया था,
जब उनको अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था तो उनकी धर्म पत्नी ने भी पति वियोग में प्राण त्याग दिये थे।
पति के इस वचन के बाद जानकी देवी ने अपने प्राण त्याग दिये। जगदेव मंडल ने पत्नी के प्राण त्यागने के बाद
अपने परिजनों से भी कहा कि आज इनकी अंत्येष्टी नहीं करनी है, मैंने पत्नी को वचन दिया है
धर्म पत्नी ने भी पति वियोग में प्राण त्याग दिये थे
कि वह भी पीछे से आ रहे हैं। मैं कल उसके पास चला जाउंगा, तब दोनों का एक ही साथ अंतिम संस्कार कर देना।
परिजन एवं ग्रामीणों ने समझा कि पत्नी के वियोग में ऐसा कह रहे हैं, उन्होंने
उनकी बात रखने तथा सांत्वना देने के खयाल से शुक्रवार को अंतिम संस्कार करने
के लिए तैयारी करने लगे। सुबह लगभग 9 बजे उन्होंने परिजनों से कहा कि
वे भी जानकी के पास जा रहे हैं, क्योंकि उसे वचन दिया है, वह मेरा इंतजार कर रही है।
दोनों पति-पत्नी को एक ही साथ एक ही चिता पर विदा कर दीजिएगा इसके बाद उन्होंने भी प्राण त्याग दिये।