
पराली की समस्या से निपटने के लिए
वर्ष 2023 में इसका विस्तार वहां के नौ जिलों में किया गया। उस वक्त पराली जलाने की घटनाओं में
54 प्रतिशत की कमी आई। इस वर्ष हरियाणा के पांच जिलों के 441 गांवों में इन परियोजनाओं का
विस्तार किया गया है। इससे एएफएल में 55 प्रतिशत की कमी आने की संभावना है।’’ ठक्कर ने
कहा कि अब पंजाब के पटियाला के 17 गांवों में इस पहल को शुरू किया गया है और उम्मीद है कि
जल्द ही वहां इस सफलता को दोहराते हुए ज्यादा से ज्यादा किसानों को इस पहल का भागीदार
बनाया जायेगा। ठक्कर ने कहा कि पराली जलाने से रोकने के लिए कंपनी का प्रयास किसानों को
पराली को एकत्रित और उनका प्रबंधन करने के लिए जरूरी कृषि मशीनरी को आसानी से उपलब्ध
कराने का इंतजाम करने के अलावा उन्हें पराली जलाने के दुष्प्रभाव के बारे में जागरूक करना है।
इसके अलावा उन्हें पराली के समुचित व्यावसायिक उपयोग के अवसरों से अवगत कराना है।
ठक्कर ने कहा, ‘‘इसके लिए किसानों के बीच जागरुकता अभियान चलाने के अलावा डेलॉयट
ने एक मोबाइल ऐप विकसित किया है। इसके जरिये किसान पराली के प्रभावी नियंत्रण के लिए
कृषि मशीनरी का सस्ते दामों पर उपयोग कर सकते हैं। इस ऐप के जरिये किसान एक दूसरे से
कृषि सामग्रियों को साझा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उपर्युक्त खेत पर पराली के समुचित
प्रबंधन के अलावा किसान पराली की गांठों को तैयार कर उसका व्यावसायिक उपयोग के जरिये
प्रति एकड़ लगभग 4,500-5,000 रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।