
भागवत के बयान के बाद BJP के साथ मतभेद
उन्होंने कहा, लेकिन इसका गलत मतलब निकाला गया और भ्रम पैदा करने के लिए इसे संदर्भ से
बाहर ले जाया गया। उनकी अहंकार वाली टिप्पणी कभी भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी या भाजपा के
किसी नेता के खिलाफ नहीं थी। अपने भाषण में भागवत ने सोमवार को मणिपुर में एक साल बाद
भी शांति बहाल ना होने पर चिंता जताई थी। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव के दौरान आम विमर्श की
आलोचना की थी और चुनाव खत्म होने और परिणाम आने के बाद क्या और कैसे होगा, इस पर
अनावश्यक बातचीत के बजाय आगे बढ़ने का आह्वान किया था। विपक्षी नेताओं ने भाजपा और मोदी
पर निशाना साधने के लिए उनकी टिप्पणियों को हथियार बना लिया। कांग्रेस महासचिव जयराम
रमेश ने कहा था कि भले ही एक तिहाई प्रधानमंत्री की अंतरात्मा या मणिपुर के लोगों की बार-बार की
पुकार भी उन्हें पिघला न पाई, शायद भागवत आरएसएस के पूर्व पदाधिकारी को मणिपुर जाने के लिए
राजी कर सकते हैं। आरएसएस सूत्रों ने कहा कि विपक्षी नेताओं के इस तरह के दावे कुछ और नहीं
बल्कि भ्रम फैलाने की राजनीति है। संघ सूत्रों ने भाजपा के वैचारिक संरक्षक माने जाने वाले आरएसएस
की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार के उस बयान से भी पल्ला झाड़ लिया जिसमें उन्होंने
भाजपा पर उसके चुनावी प्रदर्शन को लेकर निशाना साधते कहा था कि भगवान राम ने 241 पर उन
लोगों को रोका जो अहंकारी हो गए थे।