
फैले हुए हैं। इसी तरह देखने को मिल रहा है कि पाकिस्तान के जासूस भारत के कोने-कोने
में फैले हुए हैं।वह हमारे मोहल्लों और गलियों में भी घूम रहा है। पकड़े जाने पर कोई खुद
को हनी ट्रैप का शिकार बताता है तो कोई कहता है कि मोहपाश में बंध कर ऐसा किया।
ई जासूसी का काम पैसों के लिए कर रहा है तो कोई भारत से नफरत होने के चलते
दुश्मन का साथ दे रहा है। आश्चर्य तो इस बात का है कि सेना, पुलिस और अर्धसैनिक
बलों में भीपाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले पकड़े जा रहे हैं। देखा जाये तो
यह जासूस जिस थाली में खा रहे हैं उसी में छेद कर रहे हैं।
भारत के कोने कोने में कैसे फैल गया Pakistani जासूसों का नेटवर्क
जासूसों के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच एक सवाल यह भी उठता है कि
पाकिस्तान में लंबा समय बिता कर और बार-बार वहां की यात्रा कर तथा वहां
प्रशिक्षण हासिल कर भारत में जासूसी कर रहे लोगों पर हमारी एजेंसियों की
निगाह पहले क्यों नहीं पड़ी? सवाल यह भी उठता है कि इससे पहले पकड़े गये
जासूसों को कौन-सी कड़ी सजा मिली? सवाल उठता है कि बारिश के मौसम में
जिस तरह कुकुरमुत्तों की फौज उग आती है उसी तरह इस समय देश में कोने-
कोने में फैल चुके दुमश्न के जासूसी नेटवर्क की जड़ों को कैसे काटा जा सकता है?
जासूसों का जाल कैसे देशभर में फैल चुका है इसकी बानगी इन खबरों से मिलती
है–हरियाणा की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी के बाद से तो जासूसों
की गिरफ्तारी की खबरों की बाढ़-सी आ गयी है।