जोसफ साहब 17 जून को रिटायर हो रहें हैं
जोसफ साहब 17 जून को रिटायर हो रहें हैं इसलिए न तो उन्होंने केंद्र सरकार को
अपना पक्ष रखने का मौका दिया और न तो अश्विनी उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देने दिया।
कहने सुनने मे बड़ा अच्छा लगता है की भारत में कानून का राज है लेकिन अगर यह सच है
तो उसी कानून के अधीन चलते हुए न्यायाधीशों के फैसले अलग अलग क्यों होते हैं.
सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति केएम जोसफ ने आक्रांताओं के नाम पर बने शहरों
के नाम बदलने की मांग वाली अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका को 20 मिनिट में खारिज कर दिया
और लंबा चौड़ा बयान दिया जो की कानून के दायरे मे नही आता है.
भारत मे कानून का राज है या जज साहब का
न्यायाधीश को अपने फैसले के द्वारा बात रखनी चाहिए. इन दिनों एक नई पद्धति बन गई है
कि न्यायाधीश अपने विचार मौखिक रुप से व्यक्त करते हैं लेकिन ऑर्डर में नहीं लिखवाते हैं.
कोर्ट की समान्य प्रक्रिया चलती तो इस तरह की जनहित याचिका पर 5-6 साल सुनवाई चलती
लेकिन जिस तरह 20 मिनिट मे फैसला हुआ वह आश्चर्यजनक है।
जोसफ साहब 17 जून को रिटायर हो रहें हैं इसलिए न तो उन्होंने केंद्र सरकार को
अपना पक्ष रखने का मौका दिया और न तो अश्विनी उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देने दिया।
अश्विनी उपाध्याय बार बार कहते रहे कि यह केवल भारत की संप्रुभता का मुद्दा नहीं है
बल्कि भारतीयों के राइट टू डिग्निटी, राइट टू आइडेंटिटी, राइट टू रिलीजन,
राइट टू कल्चर और राइट टू इनफॉर्मेशन का भी मुद्दा है
जज साहब ने उन्हें लिखित बहस की अनुमति नहीं दिया
इसलिए वह लिखित बहस करना चाहते हैं लेकिन
जज साहब ने उन्हें लिखित बहस की अनुमति नहीं दिया.
उपाध्याय ने जोसफ साहब से कहा कि जिन स्थानों का जिक्र कुरान में है वे उसी नाम से आज भी अरब में हैं
और इसी प्रकार जिन स्थानों का जिक्र बाइबल में है वे भी उसी नाम से पाए जाते हैं
लेकिन आक्रांताओं द्वारा नाम बदलने के कारण जिन स्थानों का वर्णन
वेद पुराण गीता रामायण में है वे भारत में नहीं मिलते हैं और
इसलिए कुछ लोग हमारे वेद, पुराण, गीता, रामायण और महाभारत को काल्पनिक कहते हैं।
हमारे 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ है कीर्तेश्वरी ।
यहां पर माता का मुकुट गिरा था लेकिन मुर्शिद खां नामक आक्रांता ने कीर्तेश्वरी शक्तिपीठ
को तोड़ने के बाद उस पवित्र पौराणिक धर्मस्थल का नाम बदलकर
मुर्शिदाबाद कर दिया और इसी प्रकार विंध्याचल शक्तिपीठ को मिर्जा ने मिर्जापुर बना दिया।
भारत मे कानून का राज है या जज साहब का
भगवान विष्णु के छठवें अवतार हैं भगवान परशुराम और उनके पिताजी का नाम है
महर्षि जमदग्नि और माता जी का नाम है रेणुका। माता रेणुका के जन्मस्थान पर
महर्षि जमदग्नि का आश्रम था और उस स्थान को जमदग्निपुरम कहते थे
लेकिन जौना खां ने जमदग्नि पुरम को जौनपुर बना दिया। राजा जनक द्वारा निर्मित शहर का नाम था
विदेह और इसलिए हम लोग माता सीता को वैदेही भी कहते हैं
लेकिन मुजफ्फर खान ने विदेह को मुजफ्फरपुर बना दिया।
युद्ध टालने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने कौरवों से पांच गांव मांगा था
1. इंद्रप्रस्थ, 2. सोनप्रस्थ, 3. पानप्रस्थ, 4. व्याघ्रप्रस्थ, 5. तिलप्रस्थ।
इंद्रप्रस्थ को दिल्ली कहते हैं, सोनप्रस्थ को सोनीपत कहते हैं,
पानप्रस्थ को पानीपत कहते हैं, व्याघ्रप्रस्थ को बागपत कहते हैं और
तिल प्रस्थ को फरीद खान ने फरीदाबाद बना दिया। महारानी द्रौपदी के पिता पांचाल के राजा थे
इसलिए द्रौपदी को पांचाली कहते हैं लेकिन फरुख खान ने पंचाल को फर्रुखाबाद बना दिया।
अज्ञातवास के समय पांडवों ने राजा विराट के यहां शरण लिया था और बाद में
विराट नरेश ने अपनी पुत्री का विवाह अभिमन्यु से किया था
लेकिन होशियार खान ने विराट को होशियारपुर बना दिया।
इसी प्रकार गज प्रस्थ को गाजी खान ने गाजियाबाद बना दिया।