मोहन भागवत जी के विरुद्ध कानून की मदद लेने जा रहा हूं

मेरी यह लड़ाई अगली पीढ़ी को बचाने के लिए है

आज मोहन भागवत जी के विरुद्ध कानून की मदद लेने जा रहा हूं

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

क्योंकि उन्होंने हमारे महाभारत में दो शिवांश भाईयों को मित्र कह

समलैंगिक साबित करने के लिए झूठ फैलाया है और भगवान श्रीकृष्ण

को अफवाह फैलाने वाला तक कहा है!

आज यह इसलिए लिख रहा हूं कि लोग कह रहे हैं कि तुम ‘मोहन

भागवत’ पर मुकदमा करके अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हो।

मैंने अपनी पत्रकारिता के लिए हमेशा अपनी जिंदगी दांव कर ही लगाया है।

आज मोहन भागवत जी के विरुद्ध कानून की मदद लेने जा रहा हूं

मैं जब दैनिक जागरण में था तब मेरे मुख्य महाप्रबंधक थे निशिकांत ठाकुर जी

मैं तब क्राइम रिपोर्टर था। एक बार जागरण में मैंने आजतक के फर्जीवाड़े को एक्सपोज कर दिया।

असल में दिल्ली के द्वारका क्षेत्र में बिना ड्राइवर के गाड़ी चलने का फर्जीवाड़ा आजतक

ने फैलाया था, जबकि ड्राइवर को बगल की सीट पर बैठाकर

उसके पैर से गाड़ी को कंट्रोल करवा रहा था। यही मैंने एक्सपोज किया।

एक मीडिया, दूसरे मीडिया को एक्सपोज नहीं करता?

दैनिक जागरण बड़ा अखबार है आजतक की बहुत थू-थू हुई। गुस्से से भन्ना आजतक के

तत्कालीन संपादक कमर वहीद नकवी ने दैनिक जागरण के मालिक व संपादक

संजय गुप्त को फोन किया और कहा आपके रिपोर्टर को इतना भी पता नहीं है

कि एक मीडिया, दूसरे मीडिया को एक्सपोज नहीं करता?

इसे बाहर निकालिए। हमारे संपादक ने भी मीडिया याराना दर्शाते हुए फरमान जारी कर दिया कि संदीप को निकालो।

आज मोहन भागवत जी के विरुद्ध कानून की मदद लेने जा रहा हूं

उन्होंने कहा, किसी अन्य के कहने पर हम अपने रिपोर्टर को नहीं निकालेंगे।

संदीप एक अच्छा रिपोर्टर है, अच्छा काम करता है। मैं उसे समझा दूंगा।

फिर उन्होंने मुझे फोन किया। मुख्य महाप्रबंधक जैसा पद कभी एक साधारण

रिपोर्टर को फोन नहीं करते। ऐसा प्रोटोकॉल होता है। इसलिए उनका फोन देखकर

मैं घबरा गया। मैंने डरते-डरते उठाया । उन्होंने कहा, ‘संदीप यह तुमने क्या किया?

दूसरी मीडिया के बारे में रिपोर्ट नहीं करते। अब आगे मत करना। अच्छा काम करते हो,

करते रहो।’ उन्होंने आजतक के एडिटर को कह दिया कि मैंने अपने रिपोर्टर को समझा दिया है,

आगे से नहीं करेगा, लेकिन मैं उसे निकाल नहीं सकता। वह हमारा बेहतरीन रिपोर्टर है।

ऐसे एक बार म्लेच्छ समुदाय के एक बड़े बीफ माफिया को मैंने एक्सपोज किया।

उप्र में उसका दबदबा था। अखबार जब छप रही थी, तब जागरण के प्रबंधक की उस पर नजर गई।

उन्होंने मशीन रुकवाई। तब तक करीब 15,000 कापी छप चुकी थी।

 

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