अमेरिकी संसद ने वेद नंदा की विरासत को सम्मानित किया
भारत के विभाजन पर 2017 में डेनवर पोस्ट के लिए उनके लिखे लेख
शायद ही कोई भूल पाएगा। विभाजन के समय नंदा छोटे बच्चे थे जो
अपनी मां के साथ अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे। पंजाब के
मुस्लिम बहुल शहर गुजरांवाला (अब पाकिस्तान) में हिंदू परिवार से
आने वाले नंदा के मुस्लिम पड़ोसी ने उनके परिवार को भगाने में मदद की।
उनके पड़ोसी रातोंरात ‘जानवर’’ बन गए थे और उन्होंने वहां रह गए हिंदुओं की हत्याएं की थीं।
अमेरिकी संसद ने वेद नंदा की विरासत को सम्मानित किया
उन्होंने पोस्ट में लिखा था पूर्वी पंजाब में यही मुसलमानों के साथ हुआ और
हिंसक भीड़ ने उन्हें पाकिस्तान की ओर भागने के लिए मजबूर कर दिया था।
डीगेट ने कहा, ‘‘गुजरांवाला में 1934 में जन्मे वेद नंदा ने पंजाब विश्वविद्यालय
से शुरुआत कर एक अनुकरणीय करियर बनाया जहां उन्होंने अर्थशास्त्र में
एमए की डिग्री ली। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली,
नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय से कानून की एक डिग्री ली और उसके बाद येल
विश्वविद्यालय से परास्नातक की डिग्री हासिल की।’’ उन्होंने कहा कि
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर नंदा की स्पष्ट और तर्कसंगत व्याख्याओं ने पाठकों को महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान किया।
