आंबेडकर के प्रति नेहरू की नफरत जगजाहिर
कांग्रेस के आरोपों के बीच गृह मंत्री
अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इतिहास के कुछ तथ्यों का उल्लेख
कर ये बताने की कोशिश की है कि बीजेपी नहीं बल्कि कांग्रेस ने ही समय समय पर बाबा साहब का अपमान
किया है। वहीं बीजेपी और मोदी सरकार को आंबेडकर के सपनों को आकार देने में लगी है। अमित शाह ने
इसके लिए इतिहास के कुछ पन्नों को फिर से खोला है।समय के हिसाब से सियासत बदलती है और उस
सियासत के हिसाब से नायक भी बदले जाते हैं। आज बाबा साहब भीमराव अंबेडकर सभी राजनीतिक
पार्टियों की जरूरत बन गए हैं। ये इतिहास की वो रस्साकस्सी है जिसमें तमाम शख्सियतों को अपने
खेमें में डालने की होड़ में सभी पार्टियां लगी हैं। चाहे वो महात्मा गांधी से लेकर पटेल हों या पटेल से लेकर
अंबेडकर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाबा साहब अंबेडकर के सिद्धांतो पर चलकर पीएम बनने की बात करते
नजर आते हैं। पीएम ने संविधान निर्माता को श्रद्धांजलि देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। वहीं लोकसभा
चुनाव के वक्त विपक्ष एक नैरेटिव चलाता है कि बीजेपी सत्ता में आई तो संविधान बदल कर आरक्षण
खत्म कर देगी, और ये बात चुनावी मुद्दा बन गई। पूरे चुनाव में राहुल गांधी ने आरक्षण को मुद्दा बनाया।
हर चुनावी रैली में संविधान की कॉपी लेकर भाषण दिया। यहां तक की वो सांसद के तौर पर शपथ लेने
गए तो उस वक्त भी उनके हाथों में संविधान की कॉपी नजर आई। उसी संविधान के 75 साल पर संसद
में हुई चर्चा में दिए एक बयान ने नया राजनीतिक घमासान खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस के आरोपों के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इतिहास के कुछ तथ्यों का उल्लेख
कर ये बताने की कोशिश की है कि बीजेपी नहीं बल्कि कांग्रेस ने ही समय समय पर बाबा साहब का अपमान
किया है। वहीं बीजेपी और मोदी सरकार को आंबेडकर के सपनों को आकार देने में लगी है। अमित शाह ने
इसके लिए इतिहास के कुछ पन्नों को फिर से खोला है। अमित शाह ने कहा कि जब संसद में चर्चा चल रही
थी, तो यह साबित हो गया कि कांग्रेस ने किस तरह बाबा साहेब अंबेडकर का विरोध किया। किस तरह
कांग्रेस ने बाबा साहेब की मृत्यु के बाद भी उनका मजाक उड़ाने की कोशिश की। जहां तक भारत रत्न देने
की बात है, कांग्रेस के नेताओं ने कई बार खुद को भारत रत्न दिया है। नेहरू जी ने 1955 में खुद को भारत
रत्न दिया, इंदिरा गांधी ने 1971 में खुद को भारत रत्न दिया और बाबा साहेब को 1990 में भारत रत्न
मिला, जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में नहीं थी और भारतीय जनता पार्टी द्वारा समर्थित सरकार थीष अंबेडकर
के प्रति नेहरू की नफरत जगजाहिर है। एक सर्वदलीय मंत्रिमंडल पहली देश की कैबिनेट बनी जिसमें
बाबा साहेब अंबेडकर भी सदस्य थे, नेहरू जी प्रधानमंत्री थे। नेहरू जी की किताब ‘सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ
जवाहरलाल नेहरू’ में एक और उल्लेख आता है। नेहरू जी के आश्वासन के बावजूद भीम राव अंबेडकर
को कोई महत्वपूर्ण विभाग नहीं दिया गया… एक ओर कांग्रेस पार्टी है।