
आपसे पूछकर आदेश नहीं देंगे
शीर्ष अदालत ने सीएम के बयानों और टिप्पणियों की आलोचना की और कहा कि कोई
संवैधानिक पदाधिकारी इस तरह से कैसे बोल सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘इस
तरह के बयान लोगों के मन में आशंकाएं पैदा कर सकते हैं और अगर न्यायपालिका
विधायिका में हस्तक्षेप नहीं करती है, तो उनसे भी यही उम्मीद की जाती है। इसके साथ
ही शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि उसे इस बात की परवाह नहीं है कि कोई आलोचना
कर रहा है, लेकिन वे अपनी अंतरात्मा की आवाज के अनुसार कर्तव्यों का पालन करते
रहेंगे।इससे पहले रेड्डी ने कविता को जमानत देने के शीर्ष अदालत के फैसले पर सवाल
उठाया था और कहा था, “दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया को जमानत मिलने
में 15 महीने लग गए और यहां तक कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी अभी
भी इंतजार कर रहे हैं। फिर भी, कविता जमानत हासिल करने में कामयाब रहीं।” केवल
पांच महीनों में यह भाजपा के पर्दे के पीछे के संभावित समर्थन पर सवाल उठाता है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि बीआरएस ने तेलंगाना में लोकसभा चुनावों में भाजपा
को गुप्त रूप से समर्थन दिया था, जिसमें भाजपा के लिए आठ सीटें हासिल करने में
बीआरएस नेता हरीश राव की भागीदारी का हवाला दिया गया था।