करीना कपूर ने ब्यूटी स्टैंडर्ड पर कह डाली यह बात

करीना कपूर ने ब्यूटी स्टैंडर्ड पर कह डाली यह बात
करीना कपूर ने ब्यूटी स्टैंडर्ड पर कह डाली यह बात
बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान ने हाल ही एक इंटरव्यू में पारंपरिक ब्यूटी स्टैंडर्ड की
चुनौतियों पर अपनी बात रखीं। 40 की उम्र पार करने के बाद भी करीना कपूर खान अपनी
बेबाक वास्तविकता से प्रेरित होती रहती है।करीना कपूर खान इस साल अपनी कई
प्रभावशाली सीरीज रिलीज के साथ सफलता की लहर पर सवार हैं। एक्टिंग के प्रति
उनका अटूट जुनून साबित करता है कि उनकी जल्द ही धीमा पड़ने की कोई योजना
नहीं है। हालिए इंटरव्यू में करीना कपूर अपनी दो दशक की यात्रा के बारे खुलकर बात
कही, एक्ट्रेस ने पारंपरिक सौंदर्य मानकों को तोड़ते हुए स्क्रीन पर बेहतरीन प्रदर्शन
किया है। उन्होंने बार-बार इस विश्वास का सपोर्ट किया किया है कि सुंदरता उम्र,
आकार और शरीर के प्रकार से परे होते है।

करीना कपूर ने ब्यूटी स्टैंडर्ड पर कह डाली यह बात

हार्पर बाजार इंडिया के साथ बातचीत में करीना कपूर ने विस्तार से बताया कि कैसे उन्होंने

उम्र के साथ अपने अंदर होने वाले बदलावों को स्वीकार कर लिया है और करीना इसे

आर्टिफिशियली रूप से बदलना नहीं चाहती हैं। उन्होंने कहा, “उम्र सुंदरता का एक हिस्सा

है। यह लड़ाई झुर्रियां या युवा दिखने की कोशिश के बारे में नहीं है; यह उस उम्र को अपनाने

और प्यार करने के बारे में है जिस उम्र में आप हैं। मैं 44 वर्ष की हूं और मुझे कभी भी बेहतर

महसूस नहीं हुआ। मुझे बोटोक्स या किसी कॉस्मेटिक सुधार की आवश्यकता महसूस नहीं

होती। मेरे पति (सैफ अली खान) मुझे सेक्सी मानते हैं, मेरे दोस्त कहते हैं कि मैं अद्भुत

दिखती हूं, और मेरी फिल्में खूब चल रही हैं। मैं ऐसी भूमिकाएं निभाता हूं जो मेरी उम्र को

दर्शाती हैं और मुझे इस पर गर्व है। मैं चाहती हूं कि लोग मुझे देखें कि मैं कौन हूं और इसकी

सराहना करते हैं।” उन्होंने कहा कि जब से उन्होंने फिल्म उद्योग में प्रवेश किया, उन्हें

विश्वास दिया गया कि उनकी प्रतिभा और प्रयास उन्हें रोजगार दिलाएंगे। उन्होंने देखभाल

की, फिट रहीं और लक्ष्य बनाया स्वयं का सबसे महान संस्करण बनाया।इस बीच, करीना

ने उसी इंटरव्यू में बताया कि कैसे वह सादगी में आकर्षण ढूंढती हैं। फिल्मी दुनिया के

बीते दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा, “हम सिर्फ अपनी जींस और टी-शर्ट में दिखाई

देते थे, और वह प्रामाणिकता हमारे आकर्षण का हिस्सा थी। आज का मीडिया परिदृश्य

अलग है, जिसमें परफेक्ट दिखने का बहुत दबाव है। हालांकि, स्वयं के प्रति सच्चा

रहना ही सबसे अच्छा होता है। ऐसी दुनिया में वास्तव में खुद का होना दुर्लभ है जो

अक्सर परफेक्ट की मांग करती है।”

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