कांग्रेस के विरोध का देवेन्द्र फडणवीस ने बताया ड्रामा

 

कांग्रेस के विरोध का देवेन्द्र फडणवीस ने बताया ड्रामा
कांग्रेस के विरोध का देवेन्द्र फडणवीस ने बताया ड्रामा
पत्रकारों से बात करते हुए, फडणवीस ने अपना रुख दोहराते हुए कांग्रेस के देशव्यापी विरोध को महज
नाटकबाजी बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को पहले गृह मंत्री अमित शाह के बयान को संपादित
करने और उस पर राजनीति करने के लिए माफी मांगनी चाहिए।महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस
ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ उनके विरोध को ‘नाटक’ बताते हुए कांग्रेस पार्टी की तीखी
आलोचना की है। यह विरोध डॉ. बी आर अंबेडकर के बारे में शाह की टिप्पणियों को लेकर था। फडणवीस
ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस को संसद का समय बर्बाद करने और शाह की टिप्पणियों को गलत तरीके से
पेश करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात को रेखांकित
किया कि गांधी परिवार ने लगातार अंबेडकर का विरोध किया। 

कांग्रेस के विरोध का देवेन्द्र फडणवीस ने बताया ड्रामा

पत्रकारों से बात करते हुए, फडणवीस ने अपना रुख दोहराते हुए कांग्रेस के देशव्यापी विरोध को महज

नाटकबाजी बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को पहले गृह मंत्री अमित शाह के बयान को संपादित

करने और उस पर राजनीति करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने संसद सत्र को खराब कर दिया।

इसके साथ ही फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में अपने भाषण के दौरान जिस तरह से

कांग्रेस की पोल खोली, कैसे नेहरू से लेकर इंदिरा, राजीव से लेकर सोनिया तक कांग्रेस ने लगातार

संविधान का अपमान किया। भाजपा नेता ने कहा कि यह सब उजागर होने के बाद कांग्रेस हताश है कि

कैसे नेहरू जी से लेकर राहुल गांधी तक कांग्रेस नेताओं ने लगातार संविधान का अपमान किया है और

आरक्षण को नकारा है और हताशा में वह इस तरह की हरकत कर रही है। यह वही कांग्रेस है जिसने

लगातार बाबा साहब का अपमान किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि

कांग्रेस का इतिहास देश में दलितों और वंचितों का अपमान करने का रहा है, कांग्रेस का इतिहास

तुष्टीकरण के आधार पर दलितों और वंचितों को उनके अधिकारों से पूरी तरह रोकने की चेष्टा का

हिस्सा रहा है। तुष्टीकरण के आधार पर देश को विभाजन की कगार पर पहुंचाने का काम कांग्रेस ने

किया। जवाहर लाल नेहरू नहीं चाहते थे कि बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर संविधान सभा का हिस्सा बनें।

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