
खालिस्तानियों को खत्म करने के लिए India के साथ आया न्यूजीलैंड
न्यूजीलैंड की सरकार ने कहा कि हम भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हैं।
हम मानवाधिकार का समर्थक भी हैं। लेकिन वहीं वैद्य और शांतिपूर्ण होने चाहिए। ये प्रतिक्रिया
स्पष्ट रूप से दिखाती है कि खालिस्तानी एजेंडा न केवल गैर कानूनी है बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय
मंच पर भी कोई समर्थन नहीं मिल रहा है। खालिस्तान के इस कथाकथित जनमत संग्रह को
कवर करने में पाकिस्तानी मीडिया ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। पाकिस्तानी चैनलों ने इसे बढ़ा
चढ़ाकर पेश करने की कोशिश की। लेकिन सच्चाई ये है कि ये केवल भारत विरोधी दुस्प्रचार का
हिस्सा है। पाकिस्तान जो खुद बलूचिस्तान और अन्य प्रांतों में मानवाधिकारों का हनन कर रहा,
वो ऐसे झूठे अभियानों के जरिए ध्यान भटकाना चाह रहा है। भारत और न्यूजीलैंड के संबंध हमेशा
से सकारात्मक और मजबूत रहे हैं। हाल ही में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और न्यूजीलैंड के
विदेश मंत्री पीटर्स के बीच कई बैठके हुई। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह तथाकथित
‘जनमत संग्रह’ से अवगत है और जबकि देश “घर और दुनिया भर में मानवाधिकारों का एक
मजबूत समर्थक” है, बशर्ते ऐसी पहल वैध और शांतिपूर्ण हो। एसएफजे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया
और यूके जैसे अन्य देशों में इसी तरह के जनमत संग्रह कराता रहा है। विदेश मंत्री डॉ. एस
जयशंकर और न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स की इस साल कई बार मुलाकात हुई,
जिसमें इस महीने की शुरुआत भी शामिल है। बातचीत के प्रमुख क्षेत्र शिक्षा, प्रौद्योगिकी,
कृषि, गतिशीलता और भारत-प्रशांत की स्थिति पर रहे हैं।