
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को 11 वर्ष पूरे हो चुके हैं और
इस समय भाजपा की ओर से मोदी सरकार की उपलब्धियों का
जोरशोर से प्रचार देशभर में किया जा रहा है। इस क्रम में प्रेस
कांफ्रेंसों के अलावा समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भाजपा के
नेता पहुँच कर मोदी सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों की
चर्चा कर रहे हैं।ऐसा ही एक कार्यक्रम भाजपा की ओर से दिल्ली
के भारत मंडपम में आयोजित किया गया जिसमें डिजिटल
मीडिया के प्रतिनिधियों को देशभर से बुलाया गया और पार्टी
के शीर्ष नेतृत्व ने उनके साथ खुलकर संवाद किया।यह वाकई
ऐसा कार्यक्रम था जिसमें पार्टी के शीर्ष नेता बेझिझक सारे
सवालों के जवाब दे रहे थे। देखा जाये तो आज के इस युग
में डिजिटल और सोशल मीडिय ही सबसे बड़ी ताकत बन
चुका है इसलिए इस मंच के महारथियों के साथ भाजपा
के शीर्ष नेताओं का सीधा जुड़ाव एक अभिनव पहल भी थी।
कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष
जगत प्रकाश नड्डा, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय
मंत्री हरदीप सिंह पुरी, भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित
मालवीय और पार्टी के सारे राष्ट्रीय प्रवक्ता उपस्थित थे।
गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ रही है भाजपा
कार्यक्रम के दौरान एक पावरप्वॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिये
अश्विनी वैष्णव ने उन बड़ी पहलों का जिक्र किया जिससे
देश में व्यापक रूप से बदलाव आया और विकसित भारत
का आधार तैयार हुआ। अश्विनी वैष्णव ने विपक्ष की ओर
से अक्सर उठने वाले सवालों के जवाब भी अपनी प्रेजेंटेशन
के जरिये दिये जिससे कई चीजें स्पष्ट हुईं और भ्रम का
वातावरण छँटा।भाजपा के शीर्ष नेताओं ने डिजिटल मीडिया
प्रतिनिधियों से सीधे संवाद में स्वीकार किया कि पिछले
लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी अति-आत्मविश्वास का
शिकार हो गयी थी। भाजपा के शीर्ष नेताओं ने यह बात
मानी कि हमने इस बात पर ठीक से ध्यान नहीं दिया कि
‘अबकी बार 400 पार’ के नारे का विपरीत असर हो रहा है।
भाजपा के शीर्ष नेताओं ने यह भी माना कि आरक्षण के
विरोध में जो बात निचले स्तर तक कांग्रेस और उसके
एनजीओस ने पहुँचा दी थी उसे भांपने में हमसे देरी हुई
और जब तक हमने कदम उठाये तब तक काफी देर हो
चुकी थी। पार्टी नेताओं ने यह भी माना कि कई जगह
उम्मीदवारों के चयन में खामियां थीं। पार्टी नेताओं ने
कहा कि दरअसल लगातार जीत मिलने पर इस तरह
का अति-आत्मविश्वास ऊपर से लेकर नीचे तक आ
जाता है जिसका दुष्परिणाम देखने को मिला। पार्टी
के नेताओं ने माना कि अक्सर भाजपा के नेताओं और
कार्यकर्ताओं की गलतबयानी से पार्टी के लिए शर्मिंदगी
हो जाती है, खासकर चुनावों के समय दिये गये विवादित
बयानों से ज्यादा असहज स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
पार्टी नेताओं ने कहा कि अब वह उम्मीदवार चयन के
लिए पैमानों को और कड़ा बना रहे हैं।