
दरों को युक्तिसंगत बनाने, क्षतिपूर्ति उपकर और स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा पर मंत्रियों के समूह (जीओएम)
की इस सप्ताह की शुरुआत में बैठक हुई
और सैद्धांतिक रूप से केंद्र की दो-स्तरीय जीएसटी योजना पर सहमति बनी।
केंद्र द्वारा प्रस्तावित सुधारों के अनुसार, जीएसटी वर्तमान चार-स्तरीय 5%, 12%, 18% और 28%
की दर से दो-दर प्रणाली में परिवर्तित हो जाएगा।
त्योहारों से पहले देशवासियों को मिलेगा तोहफा, 22 सितंबर से लागू हो सकती हैं नई जीएसटी दरें
वस्तुओं और सेवाओं को ‘योग्यता’ (5%) और ‘मानक’ (18%) श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा।
चुनिंदा विलासिता और हानिकारक वस्तुओं, जैसे अल्ट्रा-प्रीमियम कारों पर 40% की विशेष दर लागू होगी
जबकि कुछ श्रम-प्रधान वस्तुओं पर रोज़गार-प्रधान क्षेत्रों को सहायता प्रदान करने के लिए
0.1%, 0.3% या 0.5% जैसी कम रियायती दरें जारी रहेंगी।
स्वतंत्रता दिवस 2025 पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगामी सुधारों की घोषणा की थी
और उन्हें ‘जीएसटी 2.0’ बताया था। जीएसटी को 2017 में अपनी शुरुआत
के बाद से सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक बताते हुए
उन्होंने आम आदमी, किसानों, मध्यम वर्ग और एमएसएमई को राहत प्रदान करने
के लिए इसे युक्तिसंगत बनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा है कि नई जीएसटी व्यवस्था लोगों को आत्मनिर्भर बनाएगी
और विनिर्माण एवं एमएसएमई में वृद्धि को बढ़ावा देगी।
पिछले हफ़्ते दरों को युक्तिसंगत बनाने, बीमा कराधान
और क्षतिपूर्ति उपकर पर मंत्रियों के समूहों (जीओएम) को संबोधित करते हुए
सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार का यह प्रस्ताव भारत के आत्मनिर्भर भारत बनने
की यात्रा में जीएसटी सुधारों की अगली पीढ़ी की शुरुआत करने के दृष्टिकोण से है।