दिल्ली की तरह यूपी और हरियाणा भी लगाएं पटाखों पर बैन

दिल्ली की तरह यूपी और हरियाणा भी लगाएं पटाखों पर बैन
दिल्ली की तरह यूपी और हरियाणा भी लगाएं पटाखों पर बैन
सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर सुनवाई की, जिसमें पटाखों पर साल भर के प्रतिबंध,
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 को लागू करने पर चर्चा की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 दिसंबर को उत्तर प्रदेश और हरियाणा को राष्ट्रीय राजधानी और उसके पड़ोसी क्षेत्रों में बिगड़ती
वायु गुणवत्ता के कारण दिल्ली के समान ही पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने
आगे कहा कि 19 दिसंबर 2024 के आदेश के तहत दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध जारी रहेगा और जनवरी
2025 में इसे जारी रखने पर विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के मुद्दे
पर सुनवाई की, जिसमें पटाखों पर साल भर के प्रतिबंध, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) और ठोस
अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 को लागू करने पर चर्चा की गई। 
 

दिल्ली की तरह यूपी और हरियाणा भी लगाएं पटाखों पर बैन

अदालत ने एनसीआर क्षेत्र के सभी राज्यों को जीआरएपी 4 से प्रभावित सभी श्रमिकों को गुजारा भत्ता देने का भी

निर्देश दिया। राज्य सरकारों को यह पता लगाना चाहिए कि कौन से कर्मचारी जीआरएपी 4 से प्रभावित हैं। किसी

को केवल पोर्टल पर पंजीकरण पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। अगर मजदूरों को गुजारा भत्ता देने के मामले में

कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो हम राज्य सरकारों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना ​​के तहत कार्रवाई

करेंगे. राज्य सरकारें इस मुद्दे पर 5 जनवरी तक जवाब दाखिल करें। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर राज्यों को पुलिस

अधिकारियों, राजस्व अधिकारियों और अन्य विभागों के अधिकारियों की कई टीमें बनाने और उन्हें दिल्ली के

प्रवेश बिंदुओं का दौरा करने और जीआरएपी IV उपायों के अनुपालन की निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपने

का निर्देश दिया।केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता गुरुवार को ‘गंभीर

प्लस’ श्रेणी में आ गई, शाम 4 बजे 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 451 दर्ज किया गया।

शहर में प्राथमिक प्रदूषक PM2.5 का स्तर खतरनाक रूप से उच्च स्तर पर देखा गया, 35 निगरानी स्टेशनों में

से 32 ने वायु गुणवत्ता को गंभीर प्लस श्रेणी में दर्ज किया। कुछ क्षेत्रों में AQI रीडिंग 470 तक दर्ज की गई।

2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले PM2.5 कण महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं क्योंकि

सांस लेने पर वे फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं। 

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