
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को नई दिल्ली में ‘हनुमंत भवन’ का उद्घाटन किया।
उन्होंने इसे सेवा, संस्कृति और आध्यात्मिक शिक्षा का केंद्र बताया और भारत के
सभ्यतागत इतिहास में संतों के योगदान पर ज़ोर दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते
हुए सिंह ने उद्घाटन को सम्मान की बात बताया और संत समाज के प्रति अपना
सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हनुमंत भवन का उद्घाटन हमारे लिए बहुत
खुशी की बात है। इस अवसर पर मैं संत समाज को नमन करता हूं। मैं सदाशिव
मंदिर ट्रस्ट का आभार व्यक्त करता हूं। संतों की सेवा के लिए समर्पित ऐसी इमारत
का उद्घाटन पूरे समाज के लिए लाभकारी है।सिंह ने कहा कि भारत लंबे समय से
ऋषियों और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा भारत
मूल रूप से ऋषियों और संतों की तपस्या की भूमि रही है। भारत की पहचान
ऋषियों की परंपरा और उन मूल्यों से बनी है जिन्होंने मानवता का रास्ता दिखाया है।
राजा भी संतों की सेवा करना सौभाग्य मानते थे। आज़ादी की लड़ाई में भी संतों ने
अहम भूमिका निभाई। उन्होंने लोगों में राष्ट्रवाद की भावना जगाई। उन्होंने राम
मंदिर आंदोलन का भी ज़िक्र करते हुए कहा कि आज़ादी के बाद, राम मंदिर
आंदोलन में संतों की भूमिका के बारे में सभी जानते हैं।
दिल्ली को मिला नया अध्यात्म केंद्र Hanumant Bhawan
सांस्कृतिक संरक्षण पर सिंह ने कहा कि जिस देश में संतों का सम्मान होता है,
वहां की संस्कृति कभी खत्म नहीं होती। यह मठ संतों की सेवा और छात्रों के
सर्वांगीण विकास के लिए भी काम करेगा। यहां वैल्यू कैंप में वैदिक शिक्षा और
नैतिक प्रशिक्षण दिया जाता है। सिंह ने शहरी इलाकों में आध्यात्मिक संस्थानों
के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “दिल्ली जैसे व्यस्त महानगर में लोगों
को आध्यात्मिक शांति की ज़रूरत महसूस होती है। ऐसे में कनखल पीठ का
सानिध्य मिलना बहुत महत्वपूर्ण है। शंकराचार्य ने खुद इस पूरी पहल का
मार्गदर्शन किया है। मुझे अपने जीवन में कई बार शंकराचार्य परंपरा के सानिध्य
में रहने का सौभाग्य मिला है।शिक्षा और सांस्कृतिक एकीकरण के बारे में उन्होंने
कहा कि विज्ञान और तकनीक के आज के दौर में, हम विज्ञान को मूल्यों के
साथ जोड़ सकते हैं। मैं ट्रस्ट से अनुरोध करता हूँ कि वे विज्ञान और तकनीक
की शिक्षा के साथ-साथ योग, ध्यान और संस्कृत जैसे विषयों को शामिल करते
हुए नियमित कैंप आयोजित करें। सिंह ने भारत की सांस्कृतिक और विकास
से जुड़ी उपलब्धियों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर के
पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने पर हमने ‘सोमनाथ स्वाभिमान उत्सव’ मनाया।
राम मंदिर, काशी कॉरिडोर और दूसरी पहलों ने देश का गौरव बढ़ाया है।
पांडुलिपियों का डिजिटाइज़ेशन भी एक अहम कदम है। यह एक नया भारत
है जहाँ समाज के हर वर्ग तक सम्मान, अवसर और विकास पहुँच रहा है।