बंगाल में जिद और जुनून का प्रतीक हैं ममता बनर्जी

 

बंगाल में जिद और जुनून का प्रतीक हैं ममता बनर्जी
बंगाल में जिद और जुनून का प्रतीक हैं ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने राजनीति में वो कर दिखाया, जो इतिहास के पन्ने में दर्ज हो गया। उन्होंने 34 साल
से बंगाल की सत्ता पर काबिज लेफ्ट को उन्होंने साल 2011 में उखाड़ फेंका। आज वह अपना 70वां
जन्मदिन मना रही हैं।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी आज
05 जनवरी को अपना 70वां जन्मदिन मना रही हैं। वह लगातार तीन बार पश्चिम बंगाल की सीएम
रह चुकी हैं। उनका सियासी सफर कांग्रेस पार्टी के साथ शुरू हुआ था। वह पश्चिम बंगाल की पहली
महिला मुख्यमंत्री हैं। ममता बनर्जी ने राजनीति में वो कर दिखाया, जो इतिहास के पन्ने में दर्ज हो
गया। उन्होंने 34 साल से बंगाल की सत्ता पर काबिज लेफ्ट को उन्होंने साल 2011 में उखाड़ फेंका
और तब से अभी तक वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं। सियासत से लेकर आम लोगों के लिए
ममता बनर्जी ‘दीदी’ हैं। तो आइए जानते हैं उनके बर्थडे के मौके पर बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री
ममता बनर्जी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…कोलकाता में 05 जनवरी 1955 को
एक गरीब परिवार में ममता बनर्जी का जन्म हुआ था। हालांकि तब भला किसको पता था कि गरीब
परिवार में जन्मी यह बच्ची एक दिन इतिहास रचेगी। लेकिन इन सब के लिए ममता बनर्जी को
काफी संघर्ष करना पड़ा और बहुत तकलीफें झेलनी पड़ीं। उनकी अब तक की यात्रा
बिलकुल भी आसान नहीं थी।

बंगाल में जिद और जुनून का प्रतीक हैं ममता बनर्जी

कम उम्र में ही ममता बनर्जी की रुचि राजनीति में जागी तो वह कांग्रेस से जुड़ गईं। इस दौरान वह

महिला कांग्रेस और फिर अखिल भारतीय युवा कांग्रेस की महासचिव बनीं। फिर साल 1975 में

ममता को बंगाल में इंदिरा कांग्रेस का महासचिव बनाया गया। साल 1978 में वह कलकत्ता

दक्षिण जिला कांग्रेस कमेटी की सचिव बनीं और साल 1984 में वह पहली बार कलकत्ता दक्षिण

सीट से जीत हासिल कर लोकसभा पहुंची। इस तरह से वह तब 8वीं लोकसभा में देश की सबसे

कम उम्र की सांसद थीं।साल 1991 में जब ममता दोबारा सांसद बनीं तो उनको केंद्रीय मानव

संसाधन विकास मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया। यह वही समय था, जब ममता ने फिर कभी

पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 1996 में वह दोबारा लोकसभा पहुंची और साल 1997 में कांग्रेस और

ममता की राहें जुदा हो गईं। ममता ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के नाम से नई पार्टी बनाई,

जो वर्तमान समय में बंगाल में सरकार चला रही है।राजनीति में आने का ममता बनर्जी का एक ही

लक्ष्य था। उन्होंने बंगाल की सत्ता पर कई दशकों से काबिज वाम दलों को उखाड़ फेंकना। इस

संघर्ष के दौरान 16 अगस्त 1990 को ममता बनर्जी पर एक हमला हुआ। जिसके कारण उनको एक

महीने तक अस्पताल में रहना पड़ा। वहीं 1993 में उन्होंने फोटो युक्त वोटर आईडी की मांग कर दी।

जिसकी वजह से कलकत्ता में स्थित बंगाल सरकार के सचिवालय राइटर्स बिल्डिंग की तरफ मोर्चा

निकाल रही थीं।

 

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