बजट में कृषि कानूनों को ‘पिछले दरवाजे’ से लाने का प्रावधान
नयी दिल्ली ।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि केंद्रीय बजट कृषि के निगमीकरण
को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही एसकेएम ने आरोप लगाया कि यह तीन कृषि कानूनों के
प्रावधानों के ‘पिछले दरवाजे से प्रवेश’ का भी रास्ता बनाने वाला है। इन कानूनों को लगभग
दो साल पहले निरस्त कर दिया गया था। एक वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन को संबोधित
करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश
किए गए बजट में किसानों की स्थिति में सुधार के लिए कोई प्रावधान नहीं है और वे विरोध
के रूप में बजट की प्रतियां जलाएंगे। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा,
‘‘बजट में किसानों के लिए कुछ नहीं है। यह पिछले साल जैसा ही है…।’’ उन्होंने कहा कि
एसकेएम किसी भी राज्य को धन मिलने का विरोध नहीं करता है। उन्होंने कहा कि बिहार
को वित्तीय पैकेज दिए गए हैं, कृषि क्षेत्र की अनदेखी की गई है और राज्य में एक मजबूत
‘मंडी’ प्रणाली बनाने के लिए कोई प्रावधान नहीं हैं। अखिल भारतीय किसान महासभा
(एआईकेएमएस) के आशीष मित्तल ने कहा कि बजट में प्राकृतिक खेती से जुड़ी घोषणा
से उत्पादन में गिरावट आ सकती है, जैसा कि श्रीलंका के मामले में हुआ था।
बजट में कृषि कानूनों को ‘पिछले दरवाजे’ से लाने का प्रावधान
उन्होंने कहा, ‘‘वे एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षित करने जा रहे हैं।
समस्या यह है कि इससे उत्पादन में कमी आएगी। श्रीलंका में भी इसी तरह के कदम से वहां
खाद्य संकट पैदा हो गया था।’’ जय किसान आंदोलन के नेता अविक साहा ने कहा कि यह
बजट कृषि कानूनों के प्रावधानों को ‘‘पिछले दरवाजे से प्रवेश’’ देने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘बजट में किसान लगभग अदृश्य हैं। यह कृषि कानूनों को पिछले दरवाजे से
प्रवेश देने की कोशिश कर रहा है।’’ संवाददाता सम्मेलन के बाद जारी एक बयान में एसकेएम
ने कहा कि बजट किसानों और श्रमिकों की कीमत पर कृषि के निगमीकरण की ओर ले
जाएगा और राज्य सरकारों के अधिकारों को छीन लेगा, जो भारत के संविधान के संघीय
चरित्र की मूल अवधारणा का उल्लंघन है। उन्होंने किसानों, श्रमिकों, महिलाओं, युवाओं
और छात्रों सहित सभी वर्गों की व्यापक एकता की अपील की, ताकि बजट के खिलाफ पूरे
भारत में बड़े पैमाने पर संघर्ष किया जा सके। एसकेएम ने कहा, ‘‘एसकेएम पूरे भारत के
किसानों से व्यापक अभियान चलाने और गांवों में विरोध प्रदर्शन करने तथा इस जनविरोधी,
कॉरपोरेट समर्थक बजट की प्रतियां जलाने की अपील करता है।’’