
बाबा के बुलडोजर के आगे स्पीडब्रेकर बनकर खड़ा हुआ SC
अदालत ने कहा कि विध्वंस का कार्य न केवल अवैध था, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार
आश्रय का अधिकार, जो जीवन के अधिकार के अंतर्गत आता है, का भी उल्लंघन करता है। सुप्रीम
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आवासीय परिसर/भवनों को बेरहमी से ध्वस्त कर दिया गया है।
इस प्रकार, अदालत ने राज्य सरकार को सभी अपीलकर्ताओं – एक वकील, एक प्रोफेसर और दो
महिलाओं को 10-10 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया, जिनके आवासीय ढांचे,
प्रयागराज के लूकरगंज में एक परिसर में स्थित थे, जिन्हें 2021 में ध्वस्त कर दिया गया था।
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना मकान ढहाने के लिए उत्तर
प्रदेश सरकार की आलोचना की थी। पीठ ने जिस तरह से मकान ढहाए गए, उसकी आलोचना
की – नोटिस देने के बमुश्किल 24 घंटे बाद – जिससे कार्यकारी निर्णय को अपील या चुनौती
देने का कोई समय नहीं मिला। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 6 मार्च को उन्हें ध्वस्त करने का
आदेश दिए जाने के बाद 7 मार्च, 2021 को उनके मकान ढहा दिए गए – जिससे उन्हें कार्यकारी
अधिकार के उल्लंघन का विरोध करने के लिए अपीलीय निकाय में जाने के लिए पर्याप्त
समय नहीं मिला।