और फिर हिन्दुस्तान धर्मशाला है क्या ?
मज़हब के आधार पर 75 साल पहले बटवारा हो जाने के बाद
पाकिस्तान भले इस्लामिक राष्ट्र बन गया हो ,
हिन्दुस्तान हिंदू राष्ट्र नहीं बन पाया !
आज जब भारत को अपनी आबादी संभालनी मुश्किल हो रही है ,
तब जिस वक्त भी बंगलादेश और पाकिस्तान को मिलाकर
अखण्ड भारत बनाने की बात होती है , तब आश्चर्य होता है!
अरे भाई अब तक पीओके तो ले नहीं पाए ,
अच्छा हो जो भारत को भारत ही रहने दो !
मज़हब के आधार पर 75 साल पहले बटवारा हो जाने के बाद
जो भी आया , यहीं बस गया !
शक आये , बस गए , हूण आये बस गए । अब पख्तूनी इलाके में , पाकिस्तान में रह गए ।
मुगल आये , बस गए । ईरान से भगाए गए पारसी आये , बस गए ।
पुर्तगाली बस गए । अंग्रेज बस गए । बंगलादेशी आये , रोहिंग्या आये , यहीं बस गए ,,,
अंग्रेज , यूनानी और पुर्तगाली बाद में लौट भी गए , पर अनेकों ने
भारतीय नागरिकता ग्रहण कर ली ।आक्रांता इतनी बड़ी संख्या में आये
और जबरिया धर्म परिवर्तन कराने के बाद यहीं के होकर रह गए ।
थे भी यहीं के तो उन्हें नागरिकता खुद ब खुद मिल गयी ।
बंगलादेशी ऐसी आबादी है , जो अंग्रेजों और मुगलों की तरह भारत को लूटने
के लिए नहीं आई । उन्हें पूर्वी पाकिस्तानी बंगालियों पर पश्चिमी पाकिस्तानी
सेना के भारी जुल्मोसितम भारत में लाये । तत्कालीन
पूर्वी पाकिस्तान के मुस्लिम बंगालियों पर अय्यूब से लेकर याहिया खान तक
पाक सेना ने जहन्नुम के जुल्म ढहाए । 1970 – 71 के बंगलादेश आजादी
आंदोलन के दौरान बंगाली लड़कियों और औरतों को पाक सैनिकों ने
अपने फ़ौजी हरमों में डाल दिया । सरे शाम औरतों की इज्ज़त चैराहों पर लूटी !
बंगाली मुसलमान शरणार्थी के रूप में भारत की तरफ़ भागे
भारत की फौजें पाकिस्तान से लड़ रहीं थी और उस माहौल में बंगाली मुसलमान शरणार्थी के
रूप में भारत की तरफ़ भागे । लाखों मुसलमानों ने असम और बंगाल के अलावा
पूर्वोत्तर के कईं राज्यों में पनाह ली । धीरे धीरे वहीं से रोटी की तलाश में दिल्ली , एनसीआर ,
यूपी , हरियाणा , पंजाब आदि प्रान्तों में बांग्लादेशी फैल गए ।
बंगलादेशियों ने घरों में झाडूपोछा से लेकर मेहनत मजदूरी के सभी काम संभाल लिए !
कुछ ही दिनों में भारत के अवसरवादी नेताओं ने बंगलादेशियों को वोटबैंक में बदलने
का खेल शुरू कर दिया । बंगलादेशियों को नागरिक न होते हुए भी नागरिकता दी गई ।
वे मुसलमान थे , अतः वोटबैंक भी बना लिए गए।
इन्हीं बाहरी मुसलमानों पर अनेक मेहरबानियां मुस्लिमों के नाम पर शुरू हो गई ।
मज़हब के आधार पर 75 साल पहले बटवारा हो जाने के बाद
सवाल यह भी है कि बंगलादेशियों के मकान किसने बनवाये , सरकारी नौकरियों में भर्ती किसने कराया ,
बिजली पानी के कनेक्शन किसने दिलाये ? उन्हीं के साथ रोहिंग्या आ गए जो आज
तक समस्या बने हुए हैं । खास बात यह है कि म्यामांर ने रोहिंग्या को लेने से यह कहते हुए
इनकार कर दिया कि वे बंगलादेशी हैं । बंगलादेशियों और
रोहिंग्या दोनों को वापस लेने के लिए बंगलादेश तैयार नहीं है ?
दुनिया का कोई देश विदेशियों को अपनी जमीन पर बिना वीजा बिना पासपोर्ट नहीं रखता !
तो क्या भारत रक्खेगा ? आश्चर्य की बात है कि 1971 को 50 साल बीत गए
किंतु बांग्लादेशियों को वापस नहीं भेजा जा सका । संसद एनआरसी कानून बनाने लगी
तो शाहीनबाग बैठा दिए गए । विदेशी बांग्लादेशी मुसलमान भारत की बहुत बड़ी समस्या बन गए हैं ।
कमाल की बात है कि भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रोहिज्ञाओं को बकायदा
बसाने का काम इस देश में किया गया । आजादी के 75 साल बीत गए ,
अमृत महोत्सव मना लिए , परंतु हिंदुस्तान आज भी धर्मशाला ही बना हुआ है ?