महा-इम्तिहान और फीफा में चीन की ‘अदृश्य’ एंट्री!

महा-इम्तिहान और फीफा में चीन की 'अदृश्य' एंट्री!
महा-इम्तिहान और फीफा में चीन की ‘अदृश्य’ एंट्री!

पिछले हफ्ते चीन में दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक परीक्षा आयोजित की गई,

जिसमें रिकॉर्ड1.29 करोड़ (12.9 मिलियन) छात्र शामिल हुए। इस सालाना

कॉलेज प्रवेश परीक्षा को ‘गाओकाओ'(Gaokao) कहा जाता है। दो से चार

दिनों तक चलने वाले इस महा-इम्तिहान को बिना किसी बाधा के पूरा कराने

के लिए सरकार ने जमीन-आसमान एक कर दिया। सरकारी मीडिया ‘सिन्हुआ’ के

अनुसार, छात्रों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए बसों के रूट बदले गए,

परीक्षा केंद्रों के आसपास निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई और शांति बनाए

रखने के लिए कई सख्त इंतजाम किए गए। भारत में चीनी दूतावास की आधिकारिक

प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया X पर इसे भारत केJEE और NEET को एक साथ

मिला देने जैसी परीक्षा बताया। उनके इस पोस्ट के आते ही इंटरनेट

पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। लोगों ने इस पोस्ट की टाइमिंग को भारत में

हाल ही में हुए NEET और CBSE परीक्षाओं के विवादों से जोड़कर देखना शुरू

कर दिया। इसी हफ्ते फीफा विश्व कप (FIFA World Cup) का भी रोमांचक आगाज

हुआ। भले ही चीन की फुटबॉल टीमइस वर्ल्ड कप का हिस्सा नहीं बन पाई, लेकिन मैदान

से लेकर बाजार तक चीनी कंपनियों और उनके प्रोडक्ट्स का ही जलवा रहा। खासकर,

मशहूर ‘लाबुबु’ (Labubu) डॉल्स के रूप में सजे वर्ल्ड कप के शुभंकर (mascots) हर

तरफ छाए रहे। इसके साथ ही, इस हफ्ते चीनी राष्ट्रपति शीजिनपिंग की उत्तर कोरिया

की पहली विदेश यात्रा भी सुर्खियों में रही, जो रणनीतिक और कूटनीतिक

रूप से बेहद खास है। हमने इसके मायने और वैश्विक राजनीति पर इसके असर

का गहराई से  विश्लेषण किया है।

महा-इम्तिहान और फीफा में चीन की ‘अदृश्य’ एंट्री!

इस परीक्षा को चीनी छात्र के स्कूली जीवन के सबसे अहम हिस्सों में से एक माना जाता है,

क्योंकि इसी से तय होता है कि वे देश के बेहतरीन कॉलेजों में दाखिला ले पाएंगे या नहीं।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, “निष्पक्षता बनाए रखने के लिए गाओकाओ

परीक्षा के दौरान कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं। कहा जाता है कि परीक्षा के सवाल तैयार

करने वाले शिक्षकों को लगभग एक महीने तक सुरक्षित जगहों पर रखा जाता है। अक्सर

परीक्षा के पेपर कड़ी सुरक्षा वाली जगहों पर छापे जाते हैं, जिनमें जेलें भी शामिल हैं; यहाँ पेपर

लीक होने से रोकने के लिए कचरा निपटान और ड्रेनेज सिस्टम पर कड़ी नज़र रखी जाती है।

” आवाजाही पर नज़र रखने के लिए सैटेलाइट ट्रैकिंग और हथियारों से लैस सुरक्षा काफिलों

का भी इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गलतियाँ नहीं होतीं।

उदाहरण के लिए, BBC के अनुसार, सालों बाद पता चला कि 2002 और 2009 के बीच

शेडोंग प्रांत में पहचान की चोरी (identity theft) के 242 मामले सामने आए थे, जिनमें

कुछ छात्रों ने योग्य उम्मीदवारों की जगह ले ली थी। 2018 में, परीक्षा में ग्रेड से छेड़छाड़ के

आरोपों के कारण दो वरिष्ठ अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया गया था। आम तौर पर,

इस परीक्षा पर आरोप लगते रहे हैं कि अमीर परिवारों और बेहतर इलाकों में रहने वाले लोग

इसमें कुछ हद तक हेर-फेर करते हैं।

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