मालदीव प्रकरण से सबक ले दुनिया
पड़ोस प्रथम की नीति पर चलने वाले भारत को छेड़ा तो खैर नहीं
जो लोग ‘नया भारत’ क्या है, यह बात आज तक नहीं समझे हैं उन्हें जरा उन टिप्पणियों पर
गौर फरमा लेना चाहिए जो ‘बॉयकॉट मालीदव’ या ‘पहले भारत के द्वीपों की सैर करो’ जैसे
हैशटैग के साथ लिखी गयी हैं। जिस तरह फिल्म उद्योग, खेल जगत और अन्य क्षेत्रों की
हस्तियों ने प्रधानमंत्री के समर्थन में टिप्पणियां करते हुए मालदीव को खरी खरी सुनाई है
उससे माले के पूरे पर्यटन उद्योग को दिन में तारे दिख गये हैं। भारतीयों के रुख को देखते
हुए अन्य देशों ने भी बड़ी प्रेरणा ली होगी क्योंकि आज के समय में
भारतीय नागरिक ही कई देशों की पर्यटन अर्थव्यवस्था में जान फूंक रहे हैं।
पड़ोस प्रथम की नीति पर चलने वाले भारत को छेड़ा तो खैर नहीं
इसके अलावा इस पूरे प्रकरण से लक्षद्वीप के पर्यटन को भी नये पंख लगना तय हो गया है
क्योंकि अधिकतर लोगों ने वहां की यात्रा की इच्छा जताई है। आने वाले दिनों में संभव है
कि वहां के लिए अधिक से अधिक फ्लाइटें शुरू हो जाएं ताकि लोग आसानी से वहां पहुँच सकें।
जहां तक मालदीव के मंत्रियों की टिप्पणियों पर भारत के आधिकारिक रुख की बात है तो
भारतीय उच्चायोग के स्तर पर तत्काल ही आपत्ति जता दी गयी थी लेकिन अब भारत में
मालदीव के राजदूत को विदेश मंत्रालय में तलब कर भी अच्छी तरह से सुना दिया गया है
और मालदीव के कई मंत्रियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर
पोस्ट की गई टिप्पणियों पर कड़ी चिंता व्यक्त की गई। हालांकि मालदीव सरकार अपने
बचाव में तर्क दे रही है कि मोदी के खिलाफ अपमानजनक सोशल
मीडिया पोस्ट को लेकर रविवार को ही तीन उप मंत्रियों को निलंबित कर दिया गया है।