
चुनाव लड़ी थी और अकेले 37 सीट जीतने वाली समाजवादी पार्टी और उसके नेता अखिलेश
यादव इन विधानसभा के उपचुनाव को 2027 के चुनाव का ट्रायल मान कर मैदान में उतारे हैं।
योगी और अखिलेश के लिए बने प्रतिष्ठा का सवाल
इसके दूसरा असर योगी आदित्यनाथ की उस छवि को और अधिक निखार देगा, जो इन
दिनों प्रखर हिंदूवादी, फायरब्रांड नेता की बन रही है और दबी जबान योगी को प्रधानमंत्री
मोदी का विकल्प बताया जा रहा है। क्योंकि अब योगी आदित्यनाथ केवल उत्तर प्रदेश के
मुख्यमंत्री ही नहीं रहे वे अब भाजपा के राष्टीय प्रचारक होने के हिंदुत्व वादी राजनेता बन
कर उभरे है जो यूपी के अलावा अन्य राज्यों में भी प्रचार कर रहे हैंl हाल ही में महाराष्ट्र चुनाव
में उनका “कटेंगे तो बटेंगे” का बयान सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ हैl
गौरतलब है कि लोकसभा में भाजपा से ज्यादा सीट समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के
गठजोड़ में जीती ली थी और ऐसे में अघोषित तौर पर योगी के खिलाफ एक वातावरण
निर्मित किया गया था जिसमें दोनों उपमुख्यमंत्रियों के कंधे से योगी को निशाने पर
लिया गया था।