
मीरजापुर। (Lok Sabha Election 2024) अभी दो चरणों का चुनाव बाकी है। जनपद
में अंतिम चरण में एक जून को वोट डाले जाएंगे। इससे पहले ही जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के
नेता और कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया के एंट्री होने की खबर ने जनपद में
भूचाल ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषक भी अब मानने लगे हैं कि राजा भैया की एंट्री के बाद
सियासी लड़ाई अब और दिलचस्प हो गई है। वह तो यहां तक कहने लगे हैं कि कहीं पूरी गेम ही
न पलट जाए, ऐसा इसलिए क्योंकि केंद्रीय मंत्री और अपना दल (एस) नेता अनुप्रिया पटेल ने
राजा भैया का लेकर जो बयान दिया है उसका असर अब उनके संसदीय क्षेत्र पर ही नहीं,
आसपास की भी सीटों पर साफ तौर पर दिखने की संभावना है।
अनुप्रिया पटेल के बयानों से क्षत्रिय समाज आहत
ऐसा इसलिए भी क्योंकि क्षत्रिय समाज अनुप्रिया के बयान से काफी आहत और नाराज दिखाई
दे रहा है। क्षत्रिय समाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाद पूर्वांचल में राजा भैया को सबसे
बड़े क्षत्रियों के सर्वमान्य नेता मानते आए हैं। ऐसे में चुनाव से पहले इस प्रकार का बयान
अशोभनीय बता रहे हैं।अभी तक राजनीतिक विश्लेषक यह मानते आ रहे हैं कि राजा भैया का
जबरदस्त प्रभाव प्रतापगढ़, कौशांबी और इलाहाबाद में देखने को मिलता है। अब ऐसी स्थिति
बन रही है कि मीरजापुर में भी इनका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
जनपद में एक लाख क्षत्रिय मतदाता प्रत्याशी के जीत में निभाते अहम भूमिका
जनपद में करीब एक लाख क्षत्रिय मतदाता है जो खुलकर वोट करते हैं। वर्ष 2019 के चुनाव में
भी क्षत्रिय समाज ने भाजपा के पक्ष में जमकर मतदान किया था, ऐसे में एनडीए प्रत्याशी करीब
साढ़े पांच लाख 91 हजार वोटों से जीती थीं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस बार
क्षत्रिय समाज नाराज दिखाई पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक राजा भैया अनुप्रिया पटेल के खिलाफ
चुनाव प्रचार कर सकते हैं। यही नहीं,उनके आने से पहले जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के कुछ
नेता मीरजापुर में अनुप्रिया पटेल के खिलाफ चुनाव प्रचार करेंगे। इसके लिए रणनीति तैयार
कर ली गई है।वहीं दूसरी तरफ जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के मीरजापुर के जिला अध्यक्ष संजू
मिश्रा का कहना है कि अनुप्रिया पटेल का बयान आहत करने वाला है।
राजा भैया की इंट्री से बढ़ी BJP की टेंशन
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि गत वर्ष 2023 में हुए छानबे उपचुनाव में भी सवर्णों ने भी
दूरी बना ली थी। इसका नतीजा यह हुआ कि एनडीए गठबंधन की प्रत्याशी रिंकी कोल ने
समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी कीर्ति कोल को सिर्फ 9589 मतों से ही पराजित कर पाई थी।
उस समय क्षत्रिय मतदाताओं में नाराजगी सिर्फ इतनी थी कि नेता उनके यहां आते ही नहीं,
ऐसे में बहुत कम संख्या में वह वोट देने बाहर निकले।यदि बिंद समाज बाहर नहीं निकलता
तो शायद परिणाम कुछ और होते। इस बार तो नाराजगी बहुत ज्यादा हो गई है। ऐसा इसलिए
क्योंकि पूर्वांचल में राजा भैया को सबसे बड़े क्षत्रियों के सर्वमान्य नेता मानते आए हैं और
उनके खिलाफ बयान काफी नागवार गुजरा है।