
इससे पहले दिन में लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने डीयू के उत्तरी परिसर
में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा
वर्ग (ओबीसी) के विद्यार्थियों के साथ बातचीत की, जिसमें प्रतिनिधित्व,
समानता और शैक्षणिक न्याय के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह
संवाद दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के कार्यालय में हुआ है।
विश्वविद्यालय ने गांधी के दौरे की निंदा की और कहा कि उसे उम्मीद है
कि ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी। बयान के अनुसार, गांधी लगभग एक
घंटे तक डूसू कार्यालय में रहे, इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने पूरे इलाके को
घेर रखा था।विश्वविद्यालय ने छात्रसंघ के कामकाज में बाधा डालने के
लिए इस दौरे की आलोचना की। बयान में कहा गया है,‘‘ डूसू कार्यालय को
सुरक्षा घेरे में ले लिया गया था और किसी को भी अंदर जाने की अनुमति
नहीं थी।’’
राहुल गांधी की अघोषित यात्रा को डीयू ने संस्थागत प्रोटोकॉल
उसमें कहा गया है कि डूसू सचिव को भी उनके कार्यालय में जाने से रोक दिया
गया था।इसमें दावा किया गया है, ‘‘कुछ विद्यार्थियों को डूसू सचिव के कमरे
में बंद कर दिया गया और एनएसयूआई छात्रों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया।’’
बयान में कहा गया है कि यह कार्रवाई उस समय की गई जब डूसू सचिव अपने
कार्यालय में प्रवेश की कोशिश में बाहर खड़ी थीं, लेकिन कांग्रेस की छात्र शाखा
एनएसयूआई के सदस्यों ने उन्हें कार्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया।
बयान में कहा गया है, ‘‘विश्वविद्यालय ऐसी कार्रवाई की निंदा करता है
और उम्मीद करता है कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा।’’ इसमें कहा गया है
,‘‘इसमें शामिल विद्यार्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’’
एनएसयूआई से संबद्ध डूसू अध्यक्ष रौनक खत्री ने पलटवार करते हुए
कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके तहत छात्रसंघ प्रमुख को
निजी अतिथि की मेजबानी के लिए अनुमति लेने की जरूरत हो।