
सियासी प्रयोगशालाएं दिन-रात जुटी हैं। खामोशी से। पूरी तन्मयता से
प्रयोग जारी है। इस चुनाव में कैराना की जनता क्या सोच रही है, कौन से चुनावी मुद्दे
हैं और आमजन के मन में क्या है, पेश है इसकी थाह लेती पलायन जैसे मुद्दे पर सुर्खियां
बटोरने वाला कैराना फिर चुनावी दंगल में है। योद्धा मैदान में आ चुके हैं। अखाड़े
में दंड-बैठक जारी है। कैराना यूं ही नहीं अहम है। यहां से चली सियासी बयार दूर
तलक जाती है। यही वजह है कि सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक रखी है। योद्धा
अपने तरकश के तीरों को पैना बनाने में जुटे हैं। शाम के चार बजे हैं। हम आम
जनता का मिजाज लेने के लिए निकले तो भारतीय किसान यूनियन के बड़े आंदोलन
का गवाह बना गांव खेड़ी करमू गुलजार मिला। यहां लोगों में चुनावी चर्चा चल रही थी
। चीनी मिलों से लौटे किसान भी चुनावी चर्चा में मशगूल दिखे। हम भी उनमें शामिल हो गए।
एक कोने से आवाज आती है, कैराना के बारे में चाहे कुछ भी कहा जाए, पर यहां भाईचारा लाजवाब है।