लोक सभा चुनाअ में क्या होगे लोगों के मुदृदे

लोक सभा चुनाअ में क्या होगे लोगों के मुद्दे
लोक सभा चुनाअ में क्या होगे लोगों के मुद्दे
सियासी प्रयोगशालाएं दिन-रात जुटी हैं। खामोशी से। पूरी तन्मयता से
प्रयोग जारी है।  इस चुनाव में कैराना की जनता क्या सोच रही है, कौन से चुनावी मुद्दे
हैं और आमजन के मन में क्या है, पेश है इसकी थाह लेती पलायन जैसे मुद्दे पर सुर्खियां
बटोरने वाला कैराना फिर चुनावी दंगल में है। योद्धा मैदान में आ चुके हैं। अखाड़े
में दंड-बैठक जारी है। कैराना यूं ही नहीं अहम है। यहां से चली सियासी बयार दूर
तलक जाती है। यही वजह है कि सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक रखी है। योद्धा
अपने तरकश के तीरों को पैना बनाने में जुटे हैं। शाम के चार बजे हैं। हम आम
जनता का मिजाज लेने के लिए निकले तो भारतीय किसान यूनियन के बड़े आंदोलन
का गवाह बना गांव खेड़ी करमू गुलजार मिला। यहां लोगों में चुनावी चर्चा चल रही थी
। चीनी मिलों से लौटे किसान भी चुनावी चर्चा में मशगूल दिखे। हम भी उनमें शामिल हो गए।
एक कोने से आवाज आती है, कैराना के बारे में चाहे कुछ भी कहा जाए, पर यहां भाईचारा लाजवाब है।

मुस्लिम बोले, जाट तो पहले ही भाजपा को वोट दे रहे थे

रात के लगभग सवा आठ बजे हैं। मगरिब की नमाज अदा की जा चुकी है। रोजा इफ्तारी
के बाद कैराना शहर की आला कला जगह पर चुनावी चर्चा चल रही है। मतलूब हसन
कहते हैं, चुनाव को जातिगत आधार पर बांटा जाता है, पर सही बात यह है कि यहां तो
मुद्दे किसानों के हैं। हिंदू, मुस्लिम सभी किसान हैं। शोर मचा है कि रालोद अब सपा का
साथ छोड़कर भाजपा के साथ चला गया। अरे भाई! पहले ही पचास प्रतिशत से ज्यादा
जाट वोटर भाजपा की ओर थे, अब जयंत कितना कमाल दिखा पाएंगे? अब्दुल कादिर
कहते हैं, रोजगार एक अहम मुद्दा है।

हिंदू गुर्जर बनाम मुस्लिम गुर्जर

कैराना सीट पर जहां हिंदू गुर्जरों की संख्या काफी है, तो मुस्लिम गुर्जर भी कम नहीं हैं।
दोनों में विचित्र समीकरण है। दोनों एक-दूसरे को सपोर्ट भी करते रहे हैं और एक-दूसरे
के खिलाफ भी ताल ठोकते रहे हैं। हिंदू गुर्जरों की कलस्यान चौपाल ओर मुस्लिम गुर्जरों
के हसन परिवार का चबूतरा इनकी राजनीति का बड़ा केंद्र रहे हैं। तैयब हसन कहते हैं,
सियासी अदावत अपनी जगह है, पर दोनों में मसले एक जैसे हैं। यही कारण है कि हिंदू
हो या मुस्लिम पक्ष, कोई किसी एक धड़े से नहीं बंधा है। जो उनसे जुड़ा है, वे उसी के
साथ खड़े हैं।

लोक सभा चुनाअ में क्या होगे लोगों के मुदृदे

शास्त्रीय संगीत के लिए पूरे विश्व में विख्यात कैराना पलायन के लिए भी बदनाम रहा।
भाजपा नेता हुकुम सिंह ने कैराना और कांधला के 346 परिवारों की एक सूची जारी की थी।
हालांकि, अब कैराना के लोग पलायन के मुद्दे को भूल गए हैं। कैराना के नसीम खान,
वसीक, रामबीर इसके सवाल पर कहते हैं, पलायन जैसी अब कोई बात नहीं है। अमन चैन है।
तीन दिन पूर्व हुए प्रबुद्ध सम्मेलन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी पलायन के
मुद्दे को छुआ अवश्य, पर अपने ही अंदाज में उसे रखा। कहा, अब कैराना में पलायन
नहीं, व्यापार आगे बढ़ रहा है। उनकी इस बात पर अन्य लोग भी मुहर लगाते हैं।

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