विदेश मंत्रियों की बैठक में बोले जयशंकर

विदेश मंत्रियों की बैठक में बोले जयशंकर
विदेश मंत्रियों की बैठक में बोले जयशंकर
टोक्यो में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में जयशंकर ने कहा कि क्वाड लंबे समय तक
टिकने़, काम करने और आगे बढ़ने के लिए है। क्वाड के सदस्य देशों के बीच सहयोग यह
सुनिश्चित कर सकता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र स्वतंत्र, खुला, स्थिर, सुरक्षित और समृद्ध बना
रहे। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि भारत में 1,400 जापानी व्यवसाय चल रहे हैं।
हम इस संख्या को बढ़ते देखना चाहते हैं, हमने 2027 तक ¥5 ट्रिलियन यानी $42 बिलियन
का निवेश लक्ष्य रखा है। जापानी कंपनियों ने कई मायनों में भारत में ऑटोमोबाइल क्रांति को
गति दी। यह साझेदारी मेट्रो के प्रसार के लिए कारण थी। हम अभी एक महत्वपूर्ण हाई-स्पीड
रेलवे परियोजना में लगे हुए हैं और निश्चित रूप से सेमीकंडक्टर, एआई या ईवी और ग्रीन
एनर्जी जैसी वैश्विक प्राथमिकताएँ हमारे साथ काम करने के लिए बहुत संभावनाएँ प्रदान करती
हैं…ये आज द्विपक्षीय और क्वाड दोनों में हमारी बातचीत का केंद्र बिंदु हैं क्योंकि इनका बड़ा
निहितार्थ है। हमारे व्यापारिक समुदायों के गहन नेटवर्किंग से हमारे प्रयासों को बल मिलेगा
, जिसे हम बढ़ावा देना चाहेंगे।

विदेश मंत्रियों की बैठक में बोले जयशंकर

टोक्यो में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में जयशंकर ने कहा कि क्वाड लंबे समय

तक टिकने़, काम करने और आगे बढ़ने के लिए है। क्वाड के सदस्य देशों के बीच सहयोग

यह सुनिश्चित कर सकता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र स्वतंत्र, खुला, स्थिर, सुरक्षित और समृद्ध

बना रहे। राजनैतिक लोकतंत्र, बहुलवादी समाज और बाजार आधारित अर्थव्यवस्था होने

के नाते क्वाड देशों पर अतिरिक्त महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। क्वाड बड़ी-बड़ी बातें करने का

नहीं, बल्कि व्यावहारिक परिणाम उत्पन्न करने का मंच है। क्वाड विश्वसनीय साझेदारी और

अंतरराष्ट्रीय सहयोग का शानदार समकालीन उदाहरण है। क्वाड देश मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत

क्षेत्र, नियम-आधारित व्यवस्था और वैश्विक भलाई के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने

कहा कि मैं ‘क्वाड’ समूह के निरंतर आगे बढ़ने में उनके मार्गदर्शन की सराहना करता हूं तथा

भारत-जापान संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के बारे में उनके विचारों को महत्व देता हूं। भारत

समेत ‘क्वाड’ (चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद) के सदस्य देशों ने सोमवार को स्वतंत्र एवं खुले हिंद

-प्रशांत को लेकर अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि किसी भी देश को दूसरे देश पर

हावी नहीं होना चाहिए तथा प्रतिस्पर्धा का जिम्मेदारी से प्रबंधन किया जाना चाहिए। 

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