वो भारतीय राजनेता जिन्हें इस साल दुनिया को कहा अलविदा
देश को राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण नुकसान हुआ। ऐसे में आपको कुछ प्रमुख राजनेताओं के नाम
बताते हैं जिन्होंने साल 2024 में दुनिया को अलविदा कह दिया।दिसबंर का महीना चल रहा है और साल
खत्म होने को है। साल 2024 वैसे तो विभिन्न कारणों से याद रखा जाएगा। इनमें से कुछ अच्छे तो कुछ
नम करने वाले भी रहे हैं। 2024 में जो प्रमुख चीजें हुईं, उनमें देश को राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण
नुकसान हुआ। ऐसे में आपको कुछ प्रमुख राजनेताओं के नाम बताते हैं जिन्होंने साल 2024 में दुनिया
को अलविदा कह दिया। अनुभवी कांग्रेस नेता और तमिलनाडु कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ईवीकेएस एलंगोवन
का 14 दिसंबर को निधन हो गया। फेफड़ों से संबंधित समस्या के कारण एलंगोवन का दो सप्ताह से अधिक
समय तक गहन उपचार चला। वह इरोड पूर्व विधायक और पूर्व गोबिचेट्टीपलायम लोकसभा थे। उन्होंने
2004 और 2009 के बीच पीएम
मनमोहन सिंह के तहत केंद्रीय कपड़ा मंत्री के रूप में कार्य किया।
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अक्टूबर को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के खेरनगर इलाके में अपराधियों की गोली का शिकार हुए
पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी बॉलीवुड सितारों के बीच काफी लोकप्रिय थे और कोविड-19 महामारी के दौरान
उन्होंने पीड़ितों की विभिन्न प्रकार से सेवाएं करके काफी तारीफ बटोरी थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी
(राकांपा) के नेता एवं महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की शनिवार रात तीन लोगों ने गोली मारकर
हत्या कर दी। देश में जब कोविड-19 का प्रकोप चरम पर था तो 66-वर्षीय राकांपा नेता ने जरूरतमंद
मरीजों के लिए उन दवाओं की व्यवस्था की थी, जिनकी बड़े पैमाने पर आवश्यकता थी। सिद्दीकी
रमजान के महीने में भव्य इफ्तार का आयोजन करने के लिए भी जाने जाते थे। इसमें बॉलीवुड के
प्रसिद्ध सितारे शामिल होते थे।
वो भारतीय राजनेता जिन्हें इस साल दुनिया को कहा अलविदा
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पांचवें महासचिव सीताराम येचुरी देश में वामपंथ के सर्वाधिक
पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक थे और वह एक ऐसे उदार वामपंथी नेता थे जिनके मित्र सभी
राजनीतिक दलों में थे। येचुरी का 72 वर्ष की आयु में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)
में निधन हो गया। येचुरी को 19 अगस्त को एम्स में भर्ती कराया गया था। येचुरी ने पार्टी के दिवंगत
नेता हरकिशन सिंह सुरजीत के मार्गदर्शन में काम सीखा, जो 1989 में गठित वी.पी. सिंह की राष्ट्रीय
मोर्चा सरकार और 1996-97 की संयुक्त मोर्चा सरकार के दौरान गठबंधन युग में एक प्रमुख नेता
थे। इन दोनों ही सरकारों को माकपा ने बाहर से समर्थन दिया था। संयुक्त मोर्चा सरकार के लिए
साझा न्यूनतम कार्यक्रम का मसौदा तैयार करने में येचुरी ने कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के साथ
काम किया था।